दूसरों के मामले में समझदार बनना आसान होता है! - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Thursday, March 15, 2012

दूसरों के मामले में समझदार बनना आसान होता है!

सत्ता के सामने कभी सयानापन नहीं चलता है 
जिसके हाथ बाजी उसकी बात में दम होता है

कोई जंजीर सबसे कमजोर कड़ी से ज्यादा मजबूत नहीं होती है
हर कोई भाग खड़ा होता जहाँ दीवार सबसे कमजोर दिखती है

जब बड़े घंटे बजने लगे तब छोटी घंटियों की आवाज दब जाती है 
जब घर में सांप घुस आये तब बोलती बंद होते देर नहीं लगती है

अपनी गलती का पता लगा लेना बहुत बड़ी समझदारी होती है
वक्त को पहचानने के लिए समझदारी की जरुरत पड़ती है

जहाज डूब जाने के बाद हर कोई बचाने का उपाय जानता है 
अक्सर दूसरों के मामले में समझदार बनना आसान होता है

नासमझ लोग बाज़ार गए तो घटिया माल भी खूब बिकता है
वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है!  

    ...कविता रावत 

94 comments:

गिरधारी खंकरियाल said...

वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है! very good.

आशा बिष्ट said...

वक्त को पहचानने के लिए समझदारी की जरुरत पड़ती हैsarv saty baat...

Shalini Khanna said...

बहुत खूब...........

P.N. Subramanian said...

सुन्दर. नासमझ बने रहें तो ज़िन्दगी आसान होती है.

ANULATA RAJ NAIR said...

हर कोई भाग खड़ा होता जहाँ दीवार सबसे कमजोर दिखती है

बहुत बहुत सार्थक अभिव्यक्ति....
सादर.

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

नासमझ लोग बाज़ार गए तो घटिया माल भी खूब बिकता है
वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है!
बहुत बढ़िया सार्थक सुंदर रचना,...

RESENT POST...काव्यान्जलि ...: तब मधुशाला हम जाते है,...

दिगम्बर नासवा said...

अक्सर दूसरों के मामले में समझदार बनना आसान होता है ...

सच कहा है ... बहुत आसान होता है ऐसा करना ... हर पंक्ति सटीक है ... दुनियादारी की बातों से लबरेज है ये रचना ...

vijay said...

नासमझ लोग बाज़ार गए तो घटिया माल भी खूब बिकता है
वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है!

वाह क्या बात है !
बहुत खूब, जोरदार लिखा है

Anonymous said...

कोई जंजीर सबसे कमजोर कड़ी से ज्यादा मजबूत नहीं होती है
हर कोई भाग खड़ा होता जहाँ दीवार सबसे कमजोर दिखती है
जब बड़े घंटे बजने लगे तब छोटी घंटियों की आवाज दब जाती है
जब घर में सांप घुस आये तब बोलती बंद होते देर नहीं लगती है
/////
बहुत सुन्दर गंभीर व विचारणीय रचना

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

कमाल की ज्ञान की बातें!!

Rahul Singh said...

पैसा/सत्‍ता की बोली में व्‍याकरण की गलतियां नहीं देखी जातीं.

Shikha Kaushik said...

EKDAM SACH ....BADHAI

Jeevan Pushp said...

जब बड़े घंटे बजने लगे तब छोटी घंटियों की आवाज दब जाती है

बहुत सुन्दर सृजन !
आभार !

संजय भास्‍कर said...

नासमझ लोग बाज़ार गए तो घटिया माल भी खूब बिकता है
वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है!
एकदम सटीक हालात बयां किये हैं.....आपने कविता जी

Anonymous said...

सत्ता के सामने कभी सयानापन नहीं चलता है
जिसके हाथ बाजी उसकी बात में दम होता है
......
पर देश में सयानों को कमी कहाँ है एक से एक बढ़कर पटे पड़े हैं ..
अति सुन्दर सार्थक सृजन ...

प्रवीण पाण्डेय said...

सच कहा, अपने व्यक्तित्व के गढ्ढे कहाँ दिखते हैं।

Nirantar said...

jo bheed ke peechhe bhaagte hein
unke saath aisaa hee hotaa hai

deepakkibaten said...

dhruv satya

Kewal Joshi said...

वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है!...

सही कहा आपने, बहुत खूब.

Satish Saxena said...

सही कहा आपने ....
शुभकामनायें !

RAJ said...

जब बड़े घंटे बजने लगे तब छोटी घंटियों की आवाज दब जाती है
जब घर में सांप घुस आये तब बोलती बंद होते देर नहीं लगती है

वाह भई क्या जबरदस्त बात कही आपने....बहुत अच्छे

डॉ टी एस दराल said...

बहुत सार्थक लोकोक्तियाँ लिखी हैं ।

Bhawna Kukreti said...

SACH ...BAHUT SAHI LIKHA HAI AAPNE ,BADHAI:)

मेरा मन पंछी सा said...

दूसरों के मामले में समझदार बनना आसान होता है!
बहुत ही बढ़िया बात कही है अपने..
नासमझ लोग बाज़ार गए तो घटिया माल भी खूब बिकता है
वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है!
एकदम सटीक और बेहतरीन सुवाक्य....
बहुत बढ़िया रचना....

हरकीरत ' हीर' said...

waah itani sari uktiyon ko ek sath padhna bhi ruchikar lga .....

aabhar...........!!

शूरवीर रावत said...

हकीकत को बयां करता एक करारा व अच्छा व्यंग्य. आभार !

मनोज कुमार said...

रचना का संदेश लाजवाब है।

Dr.NISHA MAHARANA said...

bahut accha .

लोकेन्द्र सिंह said...

बहुत खूब...

वाणी गीत said...

वहां बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मुर्खता से काम चलता है !
एक- एक पंक्ति सार्थक है !

naresh said...

बहुत ही सुंदर

अनूप शुक्ल said...

अच्छा कहा।

Amrita Tanmay said...

बरछी सी तीखी , निशाने पर लगती हुई..

pratibha said...

नासमझ लोग बाज़ार गए तो घटिया माल भी खूब बिकता है
वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है!
..बहुत खूब!
हर एक पंक्ति सुन्दर और सार्थक .

GOVIND said...

पूरा का पूरा झक्कास ..
लिखा है लाजवाब!!

Ayodhya Prasad said...

superb..

रश्मि प्रभा... said...

यह मौका कोई गंवाना नहीं चाहता

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

बहुत सुन्दर लिखा है...हर पंक्ति में एक कशिश भी एक कटाक्ष भी

jadibutishop said...

bahut badhiya likha hai aapne ...
http://jadibutishop.blogspot.com

Maheshwari kaneri said...

सार्थक अभिव्यक्ति...

https://ntyag.blogspot.com/ said...

wah wah

Udan Tashtari said...

बहुत सुन्दर!!

Rajput said...

वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है! ..

और अगर वहां बुद्धिमानी दिखाई तो मूर्खों की जमात में बैठा दिए जाओगे :)

बहुत खूब

पी.एस .भाकुनी said...

नासमझ लोग बाज़ार गए तो घटिया माल भी खूब बिकता है.......
प्रेरक प्रस्तुति .........

Kailash Sharma said...

जहाज डूब जाने के बाद हर कोई बचाने का उपाय जानता है
अक्सर दूसरों के मामले में समझदार बनना आसान होता है

....बहुत सुंदर और सटीक प्रस्तुति...

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून said...

वाह सुंदर ☺

Ramakant Singh said...

नासमझ लोग बाज़ार गए तो घटिया माल भी खूब बिकता है
वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है!
PAR UPADESH KUSHAL BAHUTERE.

shashi purwar said...

waah bahut sunder वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है! ..............sunder satik kataksh

G.N.SHAW said...

सभी वाक्य सुन्दर और शिक्षाप्रद !

प्रसन्नवदन चतुर्वेदी 'अनघ' said...

सुन्दर प्रस्तुति.....बहुत बहुत बधाई...

Anonymous said...

wah

Dr.NISHA MAHARANA said...

अक्सर दूसरों के मामले में समझदार बनना आसान होता है
नासमझ लोग बाज़ार गए तो घटिया माल भी खूब बिकता है.सुन्दर प्रस्तुति.

देवेन्द्र पाण्डेय said...

वहां बुद्दिमानी किस काम की जहां मूर्खता से काम चलता है। वाह! क्या आनंददायक बात कही आपने।

Anonymous said...

वहां बुद्दिमानी किस काम की जहां मूर्खता से काम चलता है।
wah
bahut khoob likha hai

Dolly said...

नासमझ लोग बाज़ार गए तो घटिया माल भी खूब बिकता है
वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है!
सभी वाक्य सुन्दर और शिक्षाप्रद !

Saras said...

अफ़सोस की यह जंगल राज शहर में भी चलता है

Raju Patel said...

आप के शब्दों के पीछे जो भाव है वो व्यथित कर देनेवाला भाव है.

Abhi said...

अपनी गलती का पता लगा लेना बहुत बड़ी समझदारी होती है
वक्त को पहचानने के लिए समझदारी की जरुरत पड़ती है
बहुत बहुत सार्थक अभिव्यक्ति....
सादर.

deepak said...

नासमझ लोग बाज़ार गए तो घटिया माल भी खूब बिकता है
वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है!

कविता जी बेहतरीन अभिव्यक्ति...

Ram Swaroop Verma said...

वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है!
vaah prajatantra me ek murkhta karte han (vot nahi dalne ki) phir sari budimani dhari rah jati hai jangal raj ho jata hai. bahut khoob

Vandana Ramasingh said...

कोई जंजीर सबसे कमजोर कड़ी से ज्यादा मजबूत नहीं होती है

सच कहा आपने

Dinesh pareek said...

बहुत बहुत धन्यवाद् की आप मेरे ब्लॉग पे पधारे और अपने विचारो से अवगत करवाया बस इसी तरह आते रहिये इस से मुझे उर्जा मिलती रहती है और अपनी कुछ गलतियों का बी पता चलता रहता है
दिनेश पारीक
मेरी नई रचना

कुछ अनकही बाते ? , व्यंग्य: माँ की वजह से ही है आपका वजूद: एक विधवा माँ ने अपने बेटे को बहुत मुसीबतें उठाकर पाला। दोनों एक-दूसरे को बहुत प्यार करते थे। बड़ा होने पर बेटा एक लड़की को दिल दे बैठा। लाख ...

http://vangaydinesh.blogspot.com/2012/03/blog-post_15.html?spref=bl

Dr.BHANU PRATAP said...

नासमझ लोग बाज़ार गए तो घटिया माल भी खूब बिकता है
वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है!
बहुत बढ़िया सार्थक सुंदर रचना,...

Apanatva said...

bahut khoob.

Dinesh pareek said...

बहुत बढ़िया,बेहतरीन करारी अच्छी प्रस्तुति,..
नवरात्र के ४दिन की आपको बहुत बहुत सुभकामनाये माँ आपके सपनो को साकार करे
आप ने अपना कीमती वकत निकल के मेरे ब्लॉग पे आये इस के लिए तहे दिल से मैं आपका शुकर गुजर हु आपका बहुत बहुत धन्यवाद्
मेरी एक नई मेरा बचपन
कुछ अनकही बाते ? , व्यंग्य: मेरा बचपन:
http://vangaydinesh.blogspot.in/2012/03/blog-post_23.html
दिनेश पारीक

aarkay said...

" नासमझ लोग बाज़ार गए तो घटिया माल भी खूब बिकता है
वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है! "

या यों कहें :
" कद्र दानों की तबियत का अजब रंग है आज,
बुलबुलों को है यह हसरत कि हम उल्लू न हुए "

उत्तम कविता !

RAJ said...

जहाज डूब जाने के बाद हर कोई बचाने का उपाय जानता है
अक्सर दूसरों के मामले में समझदार बनना आसान होता है
नासमझ लोग बाज़ार गए तो घटिया माल भी खूब बिकता है
वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है!
..........
.बहुत खूब!

pankaj said...

नासमझ लोग बाज़ार गए तो घटिया माल भी खूब बिकता है
वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है!

बेहतरीन अभिव्यक्ति...

Sawai Singh Rajpurohit said...

बहुत खूब लिखा है
नवसंवत्सर की हार्दिक शुभकामनाएँ|

आनन्द विश्वास said...

अति सुन्दर प्रस्तुति। अनुभब व
अनुभूति का सुन्दर समन्वय।
बहुत अच्छा सन्देश देती रचना।
धन्यवाद

आनन्द विश्वास

Pawan Kumar said...

कविता जी
नमस्कार.
नासमझ लोग बाज़ार गए तो घटिया माल भी खूब बिकता है
वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है!
सच्ची... तल्ख़ बात मगर सच यही है.....वाह वाह !!!!

सुज्ञ said...

वाह!!
विरोधाभाष की विडम्बना!!
सत्ता के सामने कभी सयानापन नहीं चलता है
जिसके हाथ बाजी उसकी बात में दम होता है

Anonymous said...

जब बड़े घंटे बजने लगे तब छोटी घंटियों की आवाज दब जाती है
जब घर में सांप घुस आये तब बोलती बंद होते देर नहीं लगती है
_______
समय की सही पहचान बताती सार्थक रचना..

संजय भास्‍कर said...

अच्‍छे शब्‍द संयोजन के साथ सशक्‍त अभिव्‍यक्ति।

संजय भास्कर
आदत....मुस्कुराने की
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

संजय भास्‍कर said...

पिछले कुछ दिनों से अधिक व्यस्त रहा इसलिए आपके ब्लॉग पर आने में देरी के लिए क्षमा चाहता हूँ...

....... रचना के लिए बधाई स्वीकारें.

Anonymous said...

हमारा भी यही हाल है... क्षमा जैसी कोई बात नहीं ...
Kavita Rawat

प्रेम सरोवर said...

बहुत सुंदर । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

M VERMA said...

जहाज डूब जाने के बाद हर कोई बचाने का उपाय जानता है
कथनी और करनी ...
बहुत सुन्दर

कीर्ति कुमार गौतम said...

नासमझ लोग बाज़ार गए तो घटिया माल भी खूब बिकता है
वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है! ................मजा आ गया .............कोई हमारे ब्लॉग पर भी आ जाए

India Darpan said...

बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


इंडिया दर्पण
की ओर से शुभकामनाएँ।

पंछी said...

sach kaha दूसरों के मामले में समझदार बनना आसान होता है!..bahut khoob

Coral said...

सत्ता के सामने कभी सयानापन नहीं चलता है
जिसके हाथ बाजी उसकी बात में दम होता है

आजकी बात बहुत सुन्दर धाग से कही है आपने

dinesh aggarwal said...

शत प्रतिशत सच....

Dr (Miss) Sharad Singh said...

सच कहा आपने...
सटीक बात...सुंदर विचार। गहन चिन्तन के लिए बधाई।

DR. ANWER JAMAL said...

अक्सर दूसरों के मामले में समझदार बनना आसान होता है

Anonymous said...

नासमझ लोग बाज़ार गए तो घटिया माल भी खूब बिकता है
वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है!

खूब कहा आपने...

धम्मू said...

अपनी गलती का पता लगा लेना बहुत बड़ी समझदारी होती है
वक्त को पहचानने के लिए समझदारी की जरुरत पड़ती है

very nice!

sushila said...

"सत्ता के सामने कभी सयानापन नहीं चलता है
जिसके हाथ बाजी उसकी बात में दम होता है"
बहुत सही कहा आपने ! जिसकी लाठी उसकी भैंस वाला मंजर ही हर जगह नज़र आता है! सारगर्भित प्रस्तुति !

Dinesh pareek said...

आपकी सभी प्रस्तुतियां संग्रहणीय हैं। .बेहतरीन पोस्ट .
मेरा मनोबल बढ़ाने के लिए के लिए
अपना कीमती समय निकाल कर मेरी नई पोस्ट मेरा नसीब जरुर आये
दिनेश पारीक
http://dineshpareek19.blogspot.in/2012/04/blog-post.html

कुमार राधारमण said...

सचमुच,हम सबके जीवन का यही फलसफा है।

Anonymous said...

सत्ता के सामने कभी सयानापन नहीं चलता है
जिसके हाथ बाजी उसकी बात में दम होता है"

बहुत सही
सारगर्भित प्रस्तुति !

Prem Prakash said...

नासमझ लोग बाज़ार गए तो घटिया माल भी खूब बिकता है
वहाँ बुद्धिमानी किस काम की जहाँ मूर्खता से काम चलता है!
सुंदर...! सारगर्भित...!

Madan Mohan Saxena said...

बहुत सटीक प्रस्तुति.वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार