दाढ़ी बढ़ा लेने पर सभी साधु नहीं बन जाते हैं - KAVITA RAWAT
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Thursday, October 16, 2014

दाढ़ी बढ़ा लेने पर सभी साधु नहीं बन जाते हैं




गुलाब को कुछ भी नाम दो उससे उतनी ही सुगंध आयेगी।
शक्कर सफेद हो या भूरी उसमें उतनी ही मिठास रहेगी।।

कभी चित्रित फूलों से सुगंध नहीं आती है।
हर चमकदार वस्तु स्वर्ण नहीं होती है।।

धूप में धूल के कण भी चमकदार मालूम पड़ते हैं।
हाथी के खाने और दिखाने के अलग दाँत होते हैं।।

सुन्दर सेब के भीतर कीड़ा लगा तो वह किसी काम नहीं आता है।
बन्दर को शाही पोशाक पहना देने पर वह बंदर ही कहलाता है।।

किसी पेड़ को उसकी छाल से नहीं जाँचना चाहिए।
सिर्फ चेहरा देख उस पर विश्वास नहीं करना चाहिए।।

जंग में जाने वाले सब लोग सैनिक नहीं होते हैं।
दाढ़ी बढ़ा लेने पर सभी साधु नहीं बन जाते हैं।।
      
  ...  कविता रावत 

33 comments:

Surya said...

किसी पेड़ को उसकी छाल से नहीं जाँचना चाहिए।
सिर्फ चेहरा देख उस पर विश्वास नहीं करना चाहिए।।
...............कम से कम आज तो आँख मूंधकर कर विशवास कर लेने का ज़माना बिलकुल भी नहीं है .....
....उम्दा रचना

Manoj Kumar said...

सुन्दर रचना कविता जी !
मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है !

Unknown said...

भावपूर्ण ,सशक्त, सुन्दर और नसीहत देती रचना

Dolly said...

सभी पंक्तियाँ सुन्दर और शिक्षाप्रद !

Rajendra kumar said...

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (17.10.2014) को "नारी-शक्ति" (चर्चा अंक-1769)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

Ranjana verma said...

सार्थक और सुन्दर प्रस्तुति....

आशीष अवस्थी said...

बेहतरीन व उम्दा लेखन , पढ़कर बहुत हि अच्छा लगा , आपको धन्यवाद !
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Meenakshi said...

सुन्दर आनुभूतिक सत्य ,निचोड़ .........-आभार !

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) said...


कल 17/अक्तूबर/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद !

Unknown said...

सुन्दर सेब के भीतर कीड़ा लगा तो वह किसी काम नहीं आता है।
बन्दर को शाही पोशाक पहना देने पर वह बंदर ही कहलाता है।।

लोकोक्तियों के माध्यम से बहुत अच्छा सन्देश दिया है आपने...

Unknown said...

गुलाब को कुछ भी नाम दो उससे उतनी ही सुगंध आयेगी।
शक्कर सफेद हो या भूरी उसमें उतनी ही मिठास रहेगी।।
,,,,,बहुत बहुत बढ़िया ................

कालीपद "प्रसाद" said...

बहुत सुन्दर लोकोक्ति में कविता !
इश्क उसने किया .....

ANULATA RAJ NAIR said...

बहुत बढ़िया....बेहद सटीक रचना..

अनु

Arogya Bharti said...

गुलाब को कुछ भी नाम दो उससे उतनी ही सुगंध आयेगी।
शक्कर सफेद हो या भूरी उसमें उतनी ही मिठास रहेगी।।
बहुत सुन्दर सटीक रचना..

गिरधारी खंकरियाल said...

जॉच परख कर ही निर्णय करना चाहिए।

Unknown said...

जबरदस्त

Unknown said...

बेहतरीन

vijay said...

लाजवाब!

vijay said...

लाजवाब!

Mamta said...

लोकोक्ति में सटीक कविता !

RAJ said...

जंग में जाने वाले सब लोग सैनिक नहीं होते हैं।
दाढ़ी बढ़ा लेने पर सभी साधु नहीं बन जाते हैं।।
.........लेकिन आज ऐसों का ही जमाना है ....
सटीक कविता ......

डॉ. मोनिका शर्मा said...

किसी पेड़ को उसकी छाल से नहीं जाँचना चाहिए।
सिर्फ चेहरा देख उस पर विश्वास नहीं करना चाहिए।।

Behtreen.... Vicharniy Panktiyan Hain

सुशील कुमार जोशी said...

जी सही बात
हमारी दाढ़ी भी बढ़ी
फिर भी
किसी काम की नहीं ।

Bharti Das said...

बहुत सुन्दर चित्रण

Unknown said...

Bilkul saarthak aur steek ... Koi shak nhi isme ... Umdaa prastuti !!

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अनूप शुक्ल said...

सही कहा!

Jayshreekar said...

धूप में धूल के कण भी चमकदार मालूम पड़ते हैं।
हाथी के खाने और दिखाने के अलग दाँत होते हैं।।

गंभीर और सटीक बात। बेहद सुंदर

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बहुत खूब!

प्रतिभा सक्सेना said...

लोकोक्तियों में समाये जीवन-दर्शन का सुन्दर उपयोग !

देवदत्त प्रसून said...

अच्छी ज्ञान-वर्द्धक प्रस्तुति !

संजय भास्‍कर said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" गुरुवार,15 अक्तूबर 2015 को में शामिल किया गया है।
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