दरिया जिधर बह निकले वही उसका रास्ता होता है - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Wednesday, October 25, 2017

दरिया जिधर बह निकले वही उसका रास्ता होता है

दो काम एक साथ हाथ में लेने पर एक भी नहीं हो पाता है।
बहुत ज्यादा सोच-विचार वाला कुछ भी नहीं कर पाता  है।।

जो कुछ नहीं जानता वह किसी बात में संदेह नहीं करता है।
जो अधिक जानता है वह कम पर भी विश्वास कर लेता है ।।

जो जल्दी विश्वास कर लेता है वह बाद में पछताता है ।
समझदार आदमी हर मामले में समझदार नहीं होता है ।।

कमजोर काठ को अक्सर कीड़ा जल्दी खा जाता है ।
दरिया जिधर बह निकले वही उसका रास्ता होता है ।।  

21 comments:

Sweta sinha said...

वाह्ह्ह....बहुत खूब👌👌
प्रेरक रचना कविता जी।

सुशील कुमार जोशी said...

सुन्दर।

दिलबागसिंह विर्क said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 26-10-2017 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2769 में दिया जाएगा
धन्यवाद

Ravindra Singh Yadav said...

नमस्ते, आपकी यह प्रस्तुति "पाँच लिंकों का आनंद" ( http://halchalwith5links.blogspot.in ) में गुरूवार 26-10-2017 को प्रातः 4:00 बजे प्रकाशनार्थ 832 वें अंक में सम्मिलित की गयी है।
चर्चा में शामिल होने के लिए आप सादर आमंत्रित हैं, आइयेगा ज़रूर।
सधन्यवाद।

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, ठुमरी साम्राज्ञी गिरिजा देवी को ब्लॉग बुलेटिन का नमन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Jyoti Dehliwal said...

सुंदर प्रस्तुति।

'एकलव्य' said...

बहुत ज्ञानवर्धक सन्देश !

Meena sharma said...

बहुत सटीक सीख दी है आपने । हर पंक्ति उपयोगी शिक्षा को अपने में समेटे हुए....

Hindikunj said...

bahut accha !
हिन्दीकुंज,हिंदी वेबसाइट/लिटरेरी वेब पत्रिका

RAKESH KUMAR SRIVASTAVA 'RAHI' said...

आपकी लिखी रचना "मित्र मंडली" में लिंक की गई है https://rakeshkirachanay.blogspot.in/2017/10/41.html पर आप सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद!

जयन्ती प्रसाद शर्मा said...

बहुत सुन्दर।

Sudha Devrani said...

बहुत ही सुन्दर

दिगम्बर नासवा said...

सही है समझदार आदमी हर मामले में समझदार नहीं होता ...
हर छंद गहरी सचाई लिए ... जमाने का आइना है ...

रेणु said...

सार्थक सन्देश भरी सुंदर सरल रचना -------

गिरधारी खंकरियाल said...

अर्थात् जीवन जैसे चल पड़े चलने दो नदी की तरह।

निर्मला कपिला said...

वाह्ह्ह्ह बहुत सुन्दर 1

Pammi singh'tripti' said...

सार्थक संदेश से परिपूर्ण सुंदर रचना..

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

सुंदर रचना..

अपर्णा वाजपेयी said...

संदेश परक, मुहावरों वाली कविता ने मन मोह लिया.
सादर

kuldeep thakur said...

जय मां हाटेशवरी...
अनेक रचनाएं पढ़ी...
पर आप की रचना पसंद आयी...
हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
इस लिये आप की रचना...
दिनांक 10/04/2018 को
पांच लिंकों का आनंद
पर लिंक की गयी है...
इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

शुभा said...

वाह!!बहुत सुंंदर !!