उद्यम से सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Friday, December 18, 2015

उद्यम से सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है

सोए हुए भेड़िए के मुँह में मेमने अपने आप नहीं चले जाते हैं।
भुने   हुए   कबूतर   हवा   में  उड़ते  हुए  नहीं  पाए  जाते  हैं।।

सोई लोमड़ी के मुँह में मुर्गी अपने-आप नहीं चली जाती है।
कोई  नाशपाती बन्द मुँह  में  अपने  आप  नहीं  गिरती है।।

गिरी  खाने  के लिए अखरोट को तोड़ना पड़ता है।
मछलियाँ पकड़ने के लिए जाल बुनना पड़ता है।।

मैदान  का नजारा देखने के लिए पहाड़ पर चढ़ना पड़ता है।
परिश्रम में कोई कमी न हो तो कुछ भी कठिन नहीं होता है।।

एक जगह मछली न मिले तो दूसरी जगह ढूँढ़ना पड़ता है।
उद्यम   से   सब   कुछ   प्राप्त   किया   जा   सकता  है।।

... कविता रावत 

24 comments:

  1. मंजिल पाने के लिए कदम तो उठाना ही पड़ेगा

    ReplyDelete
  2. प्रेरक रचना !

    ReplyDelete
  3. बिना परिश्रम कुछ नहीं मिलता ...................बहुत बहुत अच्छी कविता है

    ReplyDelete
  4. bahut sundar baat ki hai aapne....

    ReplyDelete
  5. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (19-12-2015) को "सुबह का इंतज़ार" (चर्चा अंक-2195) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  6. मैदान का नजारा देखने के लिए पहाड़ पर चढ़ना पड़ता है।
    परिश्रम में कोई कमी न हो तो कुछ भी कठिन नहीं होता है।।

    एक जगह मछली न मिले तो दूसरी जगह ढूँढ़ना पड़ता है।
    उद्यम से सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है।।
    प्रेरित करते सार्थक शब्द कविता जी ! बधाई आपको

    ReplyDelete
  7. बहुत सार्थक रचना है कविता जी.

    ReplyDelete
  8. प्रयासरत रहना ही जीवन है।

    ReplyDelete
  9. बहुत प्रेरक रचना । बिना मेहनत के कुछ नहीं मिलता ।

    ReplyDelete
  10. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 21 दिसम्बर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

    ReplyDelete
  11. बहुत बहुत शानदार रचना की प्रस्‍तुति। इस रचना की जितनी तारीफ की जाए कम है। बहुत ही उम्‍दा।

    ReplyDelete
  12. शानदार रचना की प्रस्‍तुति।मेहनत के बिना कुछ नहीं मिलता

    ReplyDelete
  13. सत्य को बयां करती प्रस्तुति...

    ReplyDelete
  14. प्रेरक और सार्थक संदेश देती रचना ।

    ReplyDelete
  15. प्रेरक रचना ।

    ReplyDelete
  16. प्रेरक रचना ।

    ReplyDelete
  17. सुंदर। उद्य़मेन ही सिध्दंति कार्याणि न मनोरथै।

    ReplyDelete