सुबह की सैर और तम्बाकू पसंद लोग - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Friday, May 31, 2019

सुबह की सैर और तम्बाकू पसंद लोग

 गर्मियों में बच्चों की स्कूल की छुट्टियाँ  लगते ही सुबह-सुबह की खटरगी कम होती है, तो स्वास्थ्य लाभ के लिए सुबह की सैर करना आनंददायक बन जाता है। यूँ तो गर्मियों की सुबह-सुबह की हवा और उसके कारण आ रही प्यारी-प्यारी नींद के कारण बिस्तर छोड़ने में थोड़ा कष्ट जरूर होता है, लेकिन स्वास्थ्य लाभ के लिए इसका त्याग करना जरूरी हो जाता है। सुबह की सैर से शरीर में नई स्फूर्ति मिल जाती है। सुबह-सुबह पक्षियों का कलरव, मंद-मंद सुगंधित हवा, उगते सूरज को देखना और स्वच्छ आकाश को निहारने से मन को जो सुखद अनुभूति होती है, वह अप्रतिम है।
सुबह की सैर स्वास्थ्य निर्माण का सर्वोत्तम उपाय है। यह सस्ता भी है और मीठा भी, जिसके लिए न तो डाॅक्टरों को फीस देनी पड़ती है और न कड़वी दवाएं खानी पड़ती है। बावजूद इसके जब सुबह-सुबह सड़क किनारे कहीं किसी बुजुर्ग तो कहीं किसी मासूम बच्चे को तम्बाकू-गुटखा बेचते और लोगों को खरीदते हुए देखती हूँ तो मन खराब हो जाता है, जिससे सैर के आनंद को फुर्र होते देर नहीं लगती। सुबह-सुबह सैर को निकले कई लोग जब काका, बाबा, गुरू, विमल, रजनीगंधा, राजविलास, राजश्री जैसे शाही और दिलखुश नामों वाले गुटखों को मुँह में दबाये, स्मार्ट सड़क पर रंगीन पिचकारी मारते हुए देखती हूँ, तब यह बात समझ से परे होती है कि आखिर ये लोग सुबह-सुबह कैसा स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं?         
         आजकल तम्बाकू-गुटखा सबसे छोटे स्तर से लेकर बड़े स्तर तक सबसे फलते-फूलते कारोबार के रूप में स्थापित होता जा रहा है। कई लोग इसका एक जरूरी प्रमुख खाद्य पदार्थ की तरह उपभोग करने लगे हैं, जिससे हरतरफ इसकी मांग जोरों पर है। यह इतना सुलभ है कि आपको दस कदम पैदल चलने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। जगह-जगह छोटे-छोटे स्टाॅलों के अलावा यह पान की दुकान, किराने की दुकान, चाय की दुकान के साथ ही ढाबों, होटलों तक अलसुबह से लेकर देर रात तक बड़ी सुगमता से मिल रहा है। आज तमाम चेतावनी के बावजूद तम्बाकू खाने वालों की कोई कमी नहीं है। हर तीसरा व्यक्ति मुंह में तम्बाकू-गुटखा दबाए बड़ी सहजता से कहीं भी नजर आ जायेगा। आज विकट स्थिति यह बनती जा रही है कि घर-परिवार के सदस्यों से लेकर एक साधारण स्कूल, मेडिकल काॅलेज, इंजीनियरिंग काॅलेज और कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले कई बच्चे और उनके कतिपय शिक्षक, सरकारी और प्रायवेट दफ्तरों में काम करने वाले बहुसंख्य अधिकारी/कर्मचारी तमाम चेतावनियों को दरकिनार कर तम्बाकू का सेवन बड़े शौक से कर रहे हैं।
          यह गंभीर विचारणीय विषय है कि तम्बाकू का सेवन हमारे देश के नौनिहालों और बुजुर्गों से लेकर युवा वर्ग, जिन्हें राष्ट्र की दूसरी पंक्ति, कल के कर्णधार, देश के नेतृत्व करने वाले और अपनी शक्ति, सामर्थ्य  व  साहस से देश को परम-वैभव तक पहुंचाने का दायित्व स्वीकारने वाला समझा जाता है, की सर्वाधिक पंसद बन गई है, जो हमारे देश सेवा, समाज सेवा और विश्व कल्याण के स्वर्णााक्षरों में लिखे इतिहास को धूल-धूसरित करने के लिए अग्रसर हैं।
  ... कविता रावत


13 comments:

M VERMA said...

छोटे बच्चे भी इसके आदी हो रहे हैं. दुकानदार १८ वर्ष से कम को भी दे देता है.

सुगठित आलेख

अनीता सैनी said...

जी नमस्ते,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (01 -06-2019) को "तम्बाकू दो छोड़" (चर्चा अंक- 3353) पर भी होगी।

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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।

आप भी सादर आमंत्रित है

….
अनीता सैनी

शिवम् मिश्रा said...

ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 31/05/2019 की बुलेटिन, " ३१ मई - विश्व तम्बाकू निषेध दिवस - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

aaiyesikhe said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति

पल्लवी गोयल said...

आदरणीय कविता जी ,यह विचारात्मक और गंभीर विषय है।यह लत कितनी जानलेवा है ,इसकी समझ
लोगों को तब समझ में आती है जब स्थिति हाथ से बाहर चली जाती है । सार्थक लेख ।
सादर ।

सुशील कुमार जोशी said...

तम्बाकू बहुत छोटी बात हो गयी है नौनिहालों की पहुँच बड़े नशों में होने लगी है सरकार सब जानती है ।

Vijay Singh Rawat said...

बहुत अच्छा Blogspot ब्लॉग है ।

दिगम्बर नासवा said...

सहमत आपकी बात से ... न सिर्फ स्वस्थ बल्कि पर्यावरण, गंदगी, जगह जगह पीक, हवा में गन्दगी सभी कुछ फैलता है इस तम्बाकू के सेवन से और लोग सुबह सिबह शुरू हो जाते हैं ...
जरूर कड़े कदम उठाने चाहियें उसके लिए सरकार को और जागरूकता भी फैलनी जरूरी है ....

kya hai kaise said...

अति सुंदर लेख

tarachand said...

aapki har post padne layak hoti h

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Hindikunj said...

बहुत ही विचारणीय लेख .समस्या बहुत बड़ी है .
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HEALTH CARE said...

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