तिन्ह कहूँ मैं पूरब वर दीन्हा
कविता रावत
अप्रैल 18, 2013
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चाँद चढ़े, सूरज चढ़े दीपक जले हजार। जिस घर में बालक नहीं वह घर निपट अंधियार।। कभी रामलीला में गुरु वशिष्ठ के सम्मुख बड़े ह...
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