वक्त की दहलीज और प्रेम का सार - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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शनिवार, 2 मई 2026

वक्त की दहलीज और प्रेम का सार


समय की निर्दयी लहरों ने जिन्हें विवश कर पृथक किया,
स्मृतियों के उन अनमोल मोतियों को, जिन्होंने मौन में संचित किया।
संसार ने प्रेम की परिभाषा उन्हीं निस्वार्थ हृदय से सीखी है,
जिन्होंने क्षणभंगुर 'वक्त' को नहीं, अपितु हर पल में 'संपूर्ण जीवन' को जिया है।
इस आपाधापी भरे जगत में, ऐसे व्यक्तित्व विरल ही मिलते हैं,
जो पराई वेदना को आत्मसात कर, करुणा के फूल सरीखे खिलते हैं।
जो विलग हुए दो हृदयों की मूक दास्तां को धैर्य से सुनते हैं,
वे ही इस कोलाहल भरी भीड़ में, मानवता का पर्याय बन कर दिखते हैं।
उनका व्यक्तित्व उस दीप सा है, जो स्वयं तपकर प्रकाश बांटता है,
जो विरह की अग्नि को सहकर, प्रेम का शुद्धतम रूप छाँटता है।
अतीत की गहराइयों से वे परिपक्वता का वह पाठ लेकर आए हैं,
कि दूरियां केवल देह की होती हैं, आत्माएं तो सदा एक दूजे में समाए हैं।

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