'कलई खुलने' से 'कलेजा मुँह को आने' तक जानिए 'क' वर्ण से जुड़े मुहावरों की बेहद खूबसूरत काव्यात्मक रूप।
भेद प्रकट हो जाना जग में, जैसे कलई खुलना,
किसी के दोषों को उजागर करना, यानी कलई खोलना।
व्यर्थ की लिखापढ़ी करने को, कहते हैं कलम घिसना,
सर्वश्रेष्ठ रचना लिखने को, कहते हैं कलम तोड़ना।
सत्य से विमुख हो जाने को, कहते हैं कलमा टूटना,
मन से खुदा को याद करना, यानी कलमा पढ़ना।
डर या उत्साह से भर जाना, यानी कलेजा उछलना,
शोक और संताप में डूबना, जैसे कलेजा कबाब होना।
सताना किसी को बहुत अधिक, यानी कलेजा खाना,
कलेजा खुरचना, कलेजा छलनी होना, दुखों का तीर चलाना।
ईर्ष्या में दिन-रात सुलगना, यानी कलेजा जलना,
दुख और अचरज में डूबे रहना, कलेजा थामकर बैठना।
भय से अचानक काँप उठना, कलेजा धक से हो जाना,
घबराहट में दिल का धड़कना, कलेजा धक-धक् करना।
सर्वस्व अर्पित कर देने को, कलेजा निकालकर रख देना,
दुख सहते-सहते थक जाने को, कलेजा पक जाना कहना।
विकल होकर रो पड़ने को, कहते हैं कलेजा पकड़ लेना,
दया भाव से भर जाने को, कहते हैं कलेजा पसीजना।
अत्यधिक प्रसन्न जो होता मन, कलेजा बल्लियों उछलना,
बेहद भयभीत और व्याकुल होना, कलेजा मुँह को आना।
... कविता रावत


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