'कान खाने' से 'कानों में उँगली डालने' तक जानिए 'क' वर्ण से जुड़े मुहावरों की बेहद खूबसूरत काव्यात्मक रूप।
बकबक करके परेशान करना, यानी किसी का कान खाना,
समझ आना, होश आना, यानी कि कान खुलना।
ध्यान से सुनना हर एक बात, कान खोलकर सुनना,
अनसुना कर देना बातों को, कान दिया न जाना।
ध्यान देने को कहते हैं सब, बात पर अपने कान देना,
कान धरना भी यही कहाए, ध्यान से सब सुन लेना।
कोई परवाह न करना ज़रा भी, कान न हिलाना,
बहुत तेज शोर जहाँ पर हो, कान पड़ी आवाज सुनाई न देना।
असर न होना कोई नसीहत, कान पर जूँ न रेंगना,
अपनी गलती पर शर्मिंदा होना, कान पर हाथ धरना।
भ्रम होना कोई आवाज आने का, कहते हैं कान बजना,
बहकावे में आ जाना किसी के, जैसे कि कान भर जाना।
पीठ पीछे किसी की शिकायत करना, यानी कान भरना,
दासता स्वीकार कर लेना, कान में कौड़ी डालना।
बात सुनकर भी अनसुनी करना, कान में तेल डालना,
एक पैसा भी पास न होना, कानी कौड़ी न होना संभालना।
जबरन नियम-कायदे सिखाना, इसे कहते कानून बघारना,
प्रतिज्ञा करना कि ऐसा न करेंगे, कानों पर हाथ धरना।
बुरी बात सुनकर अनसुनी करना, कानों में उँगली डालना,
तंग करना किसी को बेहद, यानी काफिया तंग करना।
... कविता रावत


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