'कलेजे पर छुरी चलना, 'कान खड़े होने'
तक जानिए 'क' वर्ण से जुड़े मुहावरों की बेहद
खूबसूरत काव्यात्मक रूप।
भारी आघात पहुँचाना किसी को, कलेजे पर छुरी चलना,
किसी की तरक्की देख जलना, कलेजे पर साँप लोटना।
अपनी अंतरात्मा से पूछना, कलेजे पर हाथ रखना,
शोक की अग्नि में जलना, यानी कलेजे में आग लगना।
दिल को छू जाए बात कोई, जैसे कलेजे में तीर लगना,
मन में समा जाना किसी के, यानी कलेजे में पैठना।
अपने वश में कर लेना सब, कल्ले तले दबा लेना,
नुकसान की भरपाई करना, अपनी कसर निकालना।
निर्दयी के हाथों सौंपना, कसाई के खूंटे से बाँधना,
ठहाके मारकर हँसने को, कहते हैं कहकहे लगाना।
व्यर्थ ही पन्ने भरते जाना, यानी कागज काला करना,
क्षणभंगुर सहारे को कहते, बस कागज़ की नाव होना।
केवल कागजी कार्रवाई करना, कागजी घोड़े दौड़ाना,
झिड़की देना या डाँटने को, कहते हैं काटने दौड़ना।
महामूर्ख को कहते हैं सब, यह तो है काठ का उल्लू,
स्तब्ध रह जाना विस्मय में, जैसे काठ मारना या काठ होना।
बंधन में पड़ जाना जैसे, पाँव को अपने काठ में देना,
अफवाहें फैलना चारों ओर, यानी कि कान उड़ना।
चतुराई में आगे निकलना, किसी के कान कतरना,
हर बात पर विश्वास कर लेना, कान का कच्चा होना।
तेज आवाज से परेशान होना, कान का परदा फटना,
मात देना किसी को चतुराई में, यानी कान काटना।
चौकन्ना हो जाना खतरे से, अपने कान खड़े करना,
या फिर सतर्क हो जाने को, कहते हैं कान खड़े होना।
... कविता रावत


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें