'अंधेर डाली ' से लेकर अंगारे फांकने' तक, जानिए 'अं' से जुड़े मुहावरों का बेहद खूबसूरत काव्यात्मक रूप।
जब छल की अंधेरी डाली हो, और अंधेर खाता चलता हो,
तब अंधेर नगरी का राजा, बस अंधेर ही मचाता हो।
कोई अंधे की लाठी बनकर, जीवन का अंत लेता है,
कोई अंधे के हाथ बटेर लगे, तो खुद को अंधा बनाता है।
क्रोध में अंगारे उगलना, या अंगारों पर पैर रखना,
ईर्ष्या की आग में जलकर, अंगारों पर ही लोटना।
किसी के अंजर-पंजर ढीले हों, कोई अँगड़ाई तोड़ता है,
सफलता जब न मिले हाथ, तो अंगूर खट्टे बोलता है।
स्नेह से अंक भरना कभी, कभी अंग न समाना खुशी में,
ईश्वर के आगे आँचल पसारना, हर मुश्किल और बेबसी में।
किसी पर अंगुली उठाना सरल, पर अंग छूना (कसम खाना) कठिन है,
अंधेरे घर का उजाला होना, सबसे प्यारा और हसीन है।
मदद को जब हाथ बढ़ाओ, तो कोई अँगूठा दिखाता है,
कोई अंटी मारकर चुपके से, सब कुछ हड़प जाता है।
बचपन की याद में खोकर, कोई अँगूठा चूसता रह जाए,
पर जो अंगारे फाँके, वही जग में वीर कहलाए।
... कविता रावत
कोई अंधे की लाठी बनकर, जीवन का अंत लेता है,
कोई अंधे के हाथ बटेर लगे, तो खुद को अंधा बनाता है।
क्रोध में अंगारे उगलना, या अंगारों पर पैर रखना,
ईर्ष्या की आग में जलकर, अंगारों पर ही लोटना।
किसी के अंजर-पंजर ढीले हों, कोई अँगड़ाई तोड़ता है,
सफलता जब न मिले हाथ, तो अंगूर खट्टे बोलता है।
स्नेह से अंक भरना कभी, कभी अंग न समाना खुशी में,
ईश्वर के आगे आँचल पसारना, हर मुश्किल और बेबसी में।
किसी पर अंगुली उठाना सरल, पर अंग छूना (कसम खाना) कठिन है,
अंधेरे घर का उजाला होना, सबसे प्यारा और हसीन है।
मदद को जब हाथ बढ़ाओ, तो कोई अँगूठा दिखाता है,
कोई अंटी मारकर चुपके से, सब कुछ हड़प जाता है।
बचपन की याद में खोकर, कोई अँगूठा चूसता रह जाए,
पर जो अंगारे फाँके, वही जग में वीर कहलाए।
... कविता रावत


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