हाथ में सब्र की कमान हो तो तीर निशाने पर लगता है। - KAVITA RAWAT
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Tuesday, July 9, 2013

हाथ में सब्र की कमान हो तो तीर निशाने पर लगता है।

धैर्य कडुवा लेकिन इसका फल मीठा होता है।
लोहा आग में तपकर ही फौलाद बन पाता है।।

एक-एक पायदान चढ़ने वाले पूरी सीढ़ी चढ़ जाते हैं।
जल्दी-जल्दी चढ़ने वाले जमीं पर धड़ाम से गिरते हैं।।

छटाँक भर धैर्य सेर भर सूझ-बूझ के बराबर होता है।
जल्दीबाजी में शादी करने वाला फुर्सत में पछताता है।।

उतावलापन बड़े-बड़े मंसूबों को चौपट कर देता है।
धैर्य से विपत्ति को भी वश में किया जा सकता है।।

हाथ  में सब्र की कमान हो तो तीर निशाने पर लगता है।
आराम-आराम से चलने वाला सही सलामत घर पहुँचता है।।

....कविता रावत 

46 comments:

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

उतावलापन बड़े-बड़े मंसूबों को चौपट कर देता है।
धैर्य से विपत्ति को भी वश में किया जा सकता है।।

क्या बात है, बहुत सुंदर..
मुझे वसीम बरेलवी साहब की दो लाइन याद आ रही है..

कौन सी बात, कब, कहां, कैसे कही जाती है,
ये सलीका हो, तो हर बात सुनी जाती है।

PS said...

हाथ में सब्र की कमान हो तो तीर निशाने पर लगता है।
आराम-आराम से चलने वाला सही सलामत घर पहुँचता है।
..
कविता जी सही फ़रमाया आपने सब्र था तभी अर्जुन मछली की आंख पर निशाना साध पाए ..................
अति सुन्दर ................

Ranjana verma said...

बहुत सुंदर और मीनिंग फुल पंक्तिया ......

RAJ said...

आज इस जहाँ में सबकुछ है पर धैर्य नहीं.........
आपकी यह रचना सुन्दर सीख दे रहीं है ..
साधुवाद

Unknown said...

सही लिखा आपने कविता जी,उतावलापन बड़े-बड़े मंसूबों को चौपट कर देता है आभार।

Dr. Shorya said...

वाह बहुत सुंदर, बिलकुल सार्थक कहा है, यहाँ भी पधारे


रिश्तों का खोखलापन

http://shoryamalik.blogspot.in/2013/07/blog-post_8.html

vijay said...

एक-एक पायदान चढ़ने वाले पूरी सीढ़ी चढ़ जाते हैं।
जल्दी-जल्दी चढ़ने वाले जमीं पर धड़ाम से गिरते हैं।।
.................कविता जी बहुत सुन्दर बोल!!!

डॉ टी एस दराल said...

सही कहा। धैर्य ही सफल जीवन की कुंजी है।

ANULATA RAJ NAIR said...

बहुत बढ़िया ग़ज़ल....
हलके फुल्के अंदाज़ में......

अनु

kunwarji's said...

हर एक पंक्ति जीवन राह में मार्गदर्शिका बनने के योग्य!
आभार!
कुँवर जी,

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

हाथ में सब्र की कमान हो तो तीर निशाने पर लगता है।
आराम-आराम से चलने वाला सही सलामत घर पहुँचता है।।

वाह !!! बहुत उम्दा लाजबाब गजल ,,

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अभिमन्‍यु भारद्वाज said...

बहुत सुन्‍दर रचना आभार
यहॉ भी पधारें
Create anything from 3d printer थ्री डी प्रिन्‍टर से कुछ भी बनाइयें

shashi purwar said...

बेहद सुन्दर प्रस्तुतीकरण ....!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (10-07-2013) के .. !! निकलना होगा विजेता बनकर ......रिश्तो के मकडजाल से ....!१३०२ ,बुधवारीय चर्चा मंच अंक-१३०२ पर भी होगी!
सादर...!
शशि पुरवार

Guzarish said...

आपकी रचना कल बुधवार [10-07-2013] को
ब्लॉग प्रसारण पर
कृपया पधार कर अनुग्रहित करें |
सादर
सरिता भाटिया

गिरधारी खंकरियाल said...

धैर्य ही जीवन को सफल बनाता है।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
साझा करने के लिए आभार!

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

धैर्य की महिमा को अच्छे से समझाया है आपने

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बढ़िया प्रस्तुति ....

ashokkhachar56@gmail.com said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

प्रतिभा सक्सेना said...

सूक्तियाँ ग्रहण करने योग्य हैं !

ओंकारनाथ मिश्र said...

शिक्षाप्रद पंक्तियाँ. सच्चे मार्ग पर चलने को चलने को प्रेरित करती हुई.

Maheshwari kaneri said...

हाथ में सब्र की कमान हो तो तीर निशाने पर लगता है।
आराम-आराम से चलने वाला सही सलामत घर पहुँचता है।।...शिक्षाप्रद सुन्दर पंक्तियाँ...

Kailash Sharma said...

उतावलापन बड़े-बड़े मंसूबों को चौपट कर देता है।
धैर्य से विपत्ति को भी वश में किया जा सकता है।।

...बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति...

Harihar (विकेश कुमार बडोला) said...

बहुत बढ़िया।

संजय भास्‍कर said...

एक-एक पायदान चढ़ने वाले पूरी सीढ़ी चढ़ जाते हैं।
जल्दी-जल्दी चढ़ने वाले जमीं पर धड़ाम से गिरते हैं।।
...................सही लिखा आपने कविता जी

के. सी. मईड़ा said...

सही कहा आदरणीया आपने....
धैर्य कडुवा लेकिन इसका फल मीठा होता है।
धैर्य ही सफलता की कुंजी है ..

राज चौहान said...

आराम-आराम से चलने वाला सही सलामत घर पहुँचता है।।

.... उम्दा गजल कविता जी

प्रवीण पाण्डेय said...

साँस भर विश्वास की,
एक अपरिमित आस की।

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी बातें कही गई हैं।

दिगम्बर नासवा said...

एक-एक पायदान चढ़ने वाले पूरी सीढ़ी चढ़ जाते हैं।
जल्दी-जल्दी चढ़ने वाले जमीं पर धड़ाम से गिरते हैं ...

सच कहा है ... तभी तो कहते हैं सहज पके सो मीठा होय ... धीरे धीरे रे मना धीरे सब कुछ होय ...
लाजवाब रचना है ...

Unknown said...

एक-एक पायदान चढ़ने वाले पूरी सीढ़ी चढ़ जाते हैं।
जल्दी-जल्दी चढ़ने वाले जमीं पर धड़ाम से गिरते हैं।।

छटाँक भर धैर्य सेर भर सूझ-बूझ के बराबर होता है।
जल्दीबाजी में शादी करने वाला फुर्सत में पछताता है।




वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति
कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |

Ramakant Singh said...

हाथ में सब्र की कमान हो तो तीर निशाने पर लगता है।
आराम-आराम से चलने वाला सही सलामत घर पहुँचता है।।

सार्थक प्रस्तुति

yashoda Agrawal said...

आपने लिखा....हमने पढ़ा....
और लोग भी पढ़ें; ...इसलिए शनिवार 13/07/2013 को
http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
पर लिंक की जाएगी.... आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
लिंक में आपका स्वागत है ..........धन्यवाद!

Anonymous said...

धैर्य कडुवा लेकिन इसका फल मीठा होता है।
लोहा आग में तपकर ही फौलाद बन पाता है।।

kavita verma said...

sundar shikshaprad....

poonam said...

sabr ka fal meetha hota hae

रश्मि शर्मा said...

हाथ में सब्र की कमान हो तो तीर निशाने पर लगता है।
आराम-आराम से चलने वाला सही सलामत घर पहुँचता है।। बि‍ल्‍कुल सही...

कालीपद "प्रसाद" said...

उतावलापन बड़े-बड़े मंसूबों को चौपट कर देता है।
धैर्य से विपत्ति को भी वश में किया जा सकता है।।

हाथ में सब्र की कमान हो तो तीर निशाने पर लगता है।
आराम-आराम से चलने वाला सही सलामत घर पहुँचता है।।--
सार्थक और सुन्दर अभिव्यक्ति!
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Surya said...

छटाँक भर धैर्य सेर भर सूझ-बूझ के बराबर होता है।
जल्दीबाजी में शादी करने वाला फुर्सत में पछताता है।।
बहुत सुंदर और अर्थपूर्ण अभिव्यक्ति ......

Meenakshi said...

कविता जी एक से एक बढ़कर सुन्दर सुन्दर प्यारी प्यारी बातें !

उड़ता पंछी said...

एक-एक पायदान चढ़ने वाले पूरी सीढ़ी चढ़ जाते हैं।
जल्दी-जल्दी चढ़ने वाले जमीं पर धड़ाम से गिरते हैं ...


sahi kha hai aapne

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अभिमन्‍यु भारद्वाज said...

बहुत सुन्‍दर रचना आभार
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प्रसन्नवदन चतुर्वेदी 'अनघ' said...

वाह... हर शेर उम्दा... बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

संजय भास्‍कर said...

कविता दीदी आपकी इस रचना को कविता मंच पर आज साँझा किया गया है


संजय भास्कर
कविता मंच
http://kavita-manch.blogspot.in

Amit Shukla said...

Nice information

HINDIDARSHAN said...

nice poem thanks to writer pmegp