भाग्य हमेशा साहसी इंसान का साथ देता है - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Thursday, December 8, 2016

भाग्य हमेशा साहसी इंसान का साथ देता है

बिना साहस कोई ऊँचा पद प्राप्त नहीं कर पाता है।
निराश होने पर कायर में भी साहस आ जाता है।।

मुर्गा अपने दड़बे पर बड़ा दिलेर होता है।
कुत्ता अपनी गली में शेर बन जाता है।।

शेर की मांद में घुसने पर ही उसका बच्चा पकड़ा जा सकता है।
स्वयं को सुरक्षित देखकर कायर अपने दुश्मन को ललकारता है।।

साहस के बल पर बहुत बड़े डर को भी छिपा सकते हैं।
कायर अपनी मौत से पहले कई बार मरते हैं।।

लज्जित होकर जीने से सम्मानपूर्वक मरना भला होता है।
भाग्य हमेशा साहसी इंसान का साथ देता है।।

18 comments:

सुशील कुमार जोशी said...

सुन्दर ।

RAKESH KUMAR SRIVASTAVA 'RAHI' said...

सुंदर कविता।

HindIndia said...

बहुत ही अच्छा post है, share करने के लिए धन्यवाद। :) :)

Digvijay Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 09 दिसम्बर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Unknown said...

जिसमें साहस नहीं वह कुछ नहीं कर पाता है दुनिया में आकर ..........सुन्दर पंक्तियाँ ...........

Hindikunj said...

सही लिखा है आपने !
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika

Anil Sahu said...

Shabdo me kamal hai aapke.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (09-12-2016) को नहीं ठोक पाया कभी, वह तो अपनी पीठ; चर्चामंच 2551 पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

दिगम्बर नासवा said...

सत्य झलक रहा है हर छंद से ... कायर इंसान बार बार मरता है ... अपने आप से ही कतरता है ... बहुत सुंदर लिखा है ...

Anonymous said...

बढ़िया

विभा रानी श्रीवास्तव said...

ठंढ में गर्मी का एहसास आपकी लेखनी को नमन

nayee dunia said...

बहुत सुन्दर ...

Meena sharma said...

वाह!अति सुंदर, कविता में नया बेहतरीन प्रयोग !

Jyoti Dehliwal said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति।

विश्वमोहन said...

सुन्दर ।

Sudha Devrani said...

बहुत खूब

Madhulika Patel said...

बहुत सच्ची और सूंदर रचना |

Unknown said...

धन्यवाद कविता जी । आपने बहुत अच्छी बात कही भाग्य हमेशा साहसी इन्सान का ही सााथ देता हैं ।