अति से सब जगह बचना चाहिए - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Monday, September 19, 2016

अति से सब जगह बचना चाहिए

प्रत्येक अति बुराई का रूप धारण कर लेती है।
उचित की अति अनुचित हो जाती है।।

अति मीठे को कीड़ा खा जाता है।
अति स्नेह मति बिगाड़ देता है।।

अति परिचय से अवज्ञा होने लगती है।
बहुत तेज हवा से आग भड़क उठती है।।

कानून का अति प्रयोग अत्याचार को जन्म देता है।
अमृत की अति होने पर वह विष बन जाता है।।

अत्यधिक रगड़ने पर चंदन से भी आग पैदा हो जाती है।
एक जगह पहुंचकर गुण-अवगुण में बहुत कम दूरी रह पाती है।।

अति नम्रता में अति कपट छिपा रहता है।
अत्यधिक कसने से धागा टूट जाता है।।

अति कहीं नहीं करनी चाहिए।
अति से सब जगह बचना चाहिए।

.. कविता रावत 

11 comments:

Unknown said...

अति कभी भी ठीक नहीं होती .....सुन्दर
कहा भी है ...
अति का भला न बोलना,
अति की भली न चूप,
अति का भला न बरसना,
अति की भली न धूप।

Unknown said...

अति सर्वत्र वर्जयेत्
सुन्दर ..

Mamta said...

अति मीठे को कीड़ा खा जाता है।
अति स्नेह मति बिगाड़ देता है।।

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

आपके पोस्ट की अपडेट नहीं दिख रही है! इसलिये पता ही नहीं चला जन्माष्टमी के बाद!!
अति हमेशा बुरी होती है! इसका कोई अपवाद नहीं!

Digvijay Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 21 सितम्बर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Amrita Tanmay said...

पर .... अति सुंदर है ये अति ।

Jyoti Dehliwal said...

प्रत्येक अति बुराई का रूप धारण कर लेती है।
उचित की अति अनुचित हो जाती है।।
बहुत बढ़िया!

दिगम्बर नासवा said...

सभी छंद ज्ञान की धरा समेटे ... सच है अति हर बात की बुरी है ...

Meena sharma said...

बहुत बढ़िया ! बहुत सुंदर शब्दों में दी गई सीख !

Ravindra Singh Yadav said...

सुन्दर! अति सर्वत्र वर्जयेत्.

~Sudha Singh vyaghr~ said...

सुंदर रचना. अति सर्वत्र वर्जयेत्