चुप मत रह एक लप्पड़ मार के तो देख - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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सोमवार, 12 मई 2025

चुप मत रह एक लप्पड़ मार के तो देख










हर  कठिन राह सुगम हो जाएगी तेरी,
धैर्य रख, बस कदम बढ़ा के तो देख।

स्वप्न बुनने में बहुत वक्त गँवाया तूने,
त्याग निद्रा, ज़रा बाहर निकल के तो देख।

पार कर गए जो भव-सागर सरपट दौड़कर,
स्मरण कर उन्हें, फिर उचक-दुबक के तो देख।

तट पर बैठने से हासिल न होगा कुछ तुझे,
साहस जुटा, गहरे पानी में उतर के तो देख।

तज उदासी, तुझे तेरी मंज़िल मिल ही जाएगी,
कमर कस, अब पूरे वेग से दौड़ लगा के तो देख।

सुप्त चेतना भी जागकर साथ हो लेगी तेरे,
रख विश्वास, उन्हें झिंझोड़ कर के तो देख।

छोड़ सादगी, तू भी बन 'बड़ा' और सामर्थ्यवान,
दुविधा त्याग, अवसर पर झपट्टा मार के तो देख।

बहुत हुआ अब गिड़गिड़ाना और हाथ जोड़ना,
चुप मत रह एक लप्पड़ मार के तो देख

...कविता रावत





17 टिप्‍पणियां:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बढ़िया

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शनिवार 24 अगस्त 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Dan singh rawat ने कहा…

बहुत सुंदर लाइन

गूँगी गुड़िया ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
गूँगी गुड़िया ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
शिवम् मिश्रा ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप सब को कृष्णाजन्माष्टमी के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं!!


ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 24/08/2019 की बुलेटिन, " कृष्णाजन्माष्टमी के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

गूँगी गुड़िया ने कहा…


जी नमस्ते,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (25-08-2019) को "मेक इन इंडिया " (चर्चा अंक- 3438) पर भी होगी।


चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
आप भी सादर आमंत्रित है
….
अनीता सैनी

Anuradha chauhan ने कहा…

कुछ भी हासिल न होगा बैठ किनारे तुझे
हिम्मत कर गहरे पानी उतर के तो देख
बहुत सुंदर रचना

Onkar ने कहा…

सुन्दर रचना

मन की वीणा ने कहा…

आशावादी आह्वान करता सुखद सृजन कविता जी।

VenuS "ज़ोया" ने कहा…

हुत हुआ गर गिड़गिड़ाना हाथ-पैर जोड़ना
चुप मत रह एक लप्पड़ मार के तो देख


waaah..ye huii naa baat fir...


sach he...hmaaraa moun hmaari kamzori bn bethaa he/..

बलबीर सिंह राणा 'अडिग ' ने कहा…

इन्शान की सोई शक्ति को हिम्मत और बल जगाने वाली प्रेरक कविता,

Alaknanda Singh ने कहा…

वाह कव‍िता जी, क्या खूब कहा है ...एक लप्पड़ मार के तो देख

दिगम्बर नासवा ने कहा…

यही हिम्मत तो जरूरी है ... गहरे पानी उतरना जरूरी है ... मुखत हाव से उड़ान जरूरी है ...
और सच है की हिम्मत जगा के एक लप्पड़ रसीद करना जरूरी है आत्म गौरव के लिए ... लाजवाब भाव हमेशा की तरह अलग अंदाज़ लिए आप की रचना ...

गिरधारी खंकरियाल ने कहा…

GR8.लप्पड़ मार कर आत्मविश्वास बढ़ाना आवश्यक है।

सदा ने कहा…

वाह क्या बात है .... बेहद सटीक

Health Care ने कहा…

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