बहुत लोगों को डराकर रखने वाला भी बहुत लोगों से डरता है - KAVITA RAWAT
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Thursday, September 2, 2021

बहुत लोगों को डराकर रखने वाला भी बहुत लोगों से डरता है


बुरे संग प्रार्थना करने से भले लोगों संग मिलकर डाका डालना भला
सुन्दर वस्त्र पहनकर नरक जाने से चिथड़े पहनकर स्वर्ग जाना भला

बेडौल लोहे को हथौड़े से पीट-पीटकर सीधा करना पड़ता है
शेर की मांद में घुसने वाला ही उसका बच्चा पकड़ सकता है

बूढ़ा भेड़िया जोर की चीख-पुकार सुन कभी नहीं डरता है
शेर के दांत टूट जाने पर भी वह गरजना नहीं भूलता है

कोई भी बुराई अपनी सीमा के भीतर नहीं रहती है
बुराई काम चलताऊ लेकिन अच्छाई सदा फलती है

धीरे-धीरे और लगातार आगे बढ़ने वाले दौड़ में जीत जाते हैं
आशा के साथ जीने वाले दुःख की घड़ियों में भी मुस्कुराते हैं

बुराई से बुराई लड़े तो समझो उसका अंत बहुत निकट रहता है
बहुत लोगों को डराकर रखने वाला भी बहुत लोगों से डरता है

.... कविता रावत 

11 comments:

  1. बुराई से बुराई लड़े तो समझो उसका अंत बहुत निकट रहता है
    बहुत लोगों को डराकर रखने वाला भी बहुत लोगों से डरता है
    बहुत सुंदर रचना.....

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  2. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार (03-09-2021) को "बैसाखी पर चलते लोग" (चर्चा अंक- 4176) पर होगी। चर्चा में आप सादर आमंत्रित हैं।
    धन्यवाद सहित।

    "मीना भारद्वाज"

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  3. सहमत हूँ कविता जी आपके भावों से।

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  4. बुराई से बुराई लड़े तो समझो उसका अंत बहुत निकट रहता है
    बहुत लोगों को डराकर रखने वाला भी बहुत लोगों से डरता है

    बिलकुल सत्य। शायद अंत नजदीक है,बेहतरीन सृजन,सादर नमन कविता जी

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  5. अत्यंत सारगर्भित और सामयिक भी।

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  6. कहा गया है न कि लोहलोहे को काटता है
    सटीक 👌👌👌

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  7. बहुत सटीक ऐवं सारगर्भित....
    लाजवाब सृजन।

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  8. सहमत हैं दी आपसे बहुत ही बढ़िया कहा।
    सादर

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  9. सारगर्भित और सुंदर प्रस्तुति । बहुत शुभकामनायें ।

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  10. 'बहुत लोगों को डराकर रखने वाला भी बहुत लोगों से डरता है'... 'कोई भी बुराई अपनी सीमा के भीतर नहीं रहती है,
    बुराई काम चलताऊ लेकिन अच्छाई सदा फलती है'- मनोविज्ञान से परिपूर्ण सुन्दर अभिव्यक्ति!

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  11. कविता रावत जी बहुत ही अच्छी पंक्तियाँ लिखी है आपने। धन्यवाद।   Zee Talwara

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