हर मनुष्य की अपनी-अपनी जगह होती है - KAVITA RAWAT
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Friday, November 20, 2015

हर मनुष्य की अपनी-अपनी जगह होती है

हरेक पैर में एक ही जूता नहीं पहनाया जा सकता है।
हरेक  पैर  के  लिए  अपना  ही जूता ठीक रहता है।।

सभी लकड़ी तीर बनाने के लिए उपयुक्त नहीं रहती है। 
सब   चीजें  सब  लोगों  पर  नहीं  जँचती   है।।

कोई जगह नहीं मनुष्य ही उसकी शोभा बढ़ाता  है। 
बढ़िया कुत्ता बढ़िया हड्डी का हकदार बनता है ।।

एक मनुष्य का भोजन दूसरे के लिए विष हो सकता है ।
सबसे  बढ़िया  सेब को  सूअर  उठा ले  भागता  है।।

शहद गधे को खिलाने की चीज नहीं होती है ।
सोना नहीं गधे को तो घास पसंद आती है ।।

हरेक चाबी हरेक ताले में नहीं लग पाती है ।
हर मनुष्य की अपनी-अपनी जगह होती है ।। 

                            .... कविता रावत  


22 comments:

Anonymous said...

हर मनुष्य की अपनी-अपनी जगह होती है

Rajendra kumar said...

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (20.11.2015) को "आतंकवाद मानव सम्यता के लिए कलंक"(चर्चा अंक-2166) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ, सादर...!

हमारीवाणी said...

कविता जी, आपके ब्लॉग की तिथि की सेटिंग सही नहीं है, जिसके कारण यह आपकी ब्लॉगपोस्ट की तारिख एक दिन बाद की दिखता है. जैसे इस पोस्ट की प्रकाशन की तिथि 20 नवम्बर दिखाई दे रही है. इस कारण 'हमारीवाणी' पर आपकी पोस्ट से समस्या उत्पन्न होती है, आपसे अनुरोध है कि ब्लॉग की सेटिंग में जाकर चैक करें!

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 20 नवम्बबर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

ASHWANI KUMAR said...

बहुत ही बढ़िया...

vijay said...

हरेक चाबी हरेक ताले में नहीं लग पाती है ।
हर मनुष्य की अपनी-अपनी जगह होती है ।।
............................................
तभी तो अलग अलग ताले बनते हैं रहते एक जैसे हैं इंसान जैसे ...
बहुत सुन्दर ..............

RAJ said...

सत्य कथन /........

रचना दीक्षित said...

सच कहा कविता जी हरेक की अपनी उपयोगिता है.

Unknown said...

हरेक अपनी जगह पर ही अच्छा लगता है किसी और के नहीं ....................बहुत बहुत बहुत सुन्दर .............

Malti Mishra said...

सुंदर प्रस्तुति

Malti Mishra said...

सुंदर प्रस्तुति

जमशेद आज़मी said...

बहुत ही सुंदर रचना की प्रस्‍तुति।

Rishabh Shukla said...

​​​​सुन्दर रचना ..........बधाई |
​​​​​​​​आप सभी का स्वागत है मेरे इस #ब्लॉग #हिन्दी #कविता #मंच के नये #पोस्ट #चलोसियासतकरआये पर | ब्लॉग पर आये और अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें |

http://hindikavitamanch.blogspot.in/2015/11/chalo-siyasat-kar-aaye.html​​

HARSHVARDHAN said...

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ब्लॉग बुलेटिन - कवियित्री निर्मला ठाकुर जी की प्रथम पुण्यतिथि में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

राजीव कुमार झा said...

बहुत सुंदर.

गिरधारी खंकरियाल said...

सावधान! चोर एक ही चाबी का इस्तेमाल कई तालों में भी कर देते हैं।

प्रतिभा सक्सेना said...

सबका अपना रोल होता है ,यही दुनिया है !

महेन्‍द्र वर्मा said...

सही है, जो जिस जगह के लिए उपयुक्त है उसे वहीं होना चाहिए ।

अच्छी रचना ।

Unknown said...

बहुत सही बात कही रचना के माध्यम से ।

Unknown said...

बहुत सही बात कही रचना के माध्यम से ।

Madhulika Patel said...

आप की शादी की सालगिरह की कविता बहुत सुंदर थी । शादी की सालगिरह पर बहुत बहुत बधाई ।

RITA GUPTA said...

बहुत सुंदर रचना वाह .