सच और झूठ का सम्बन्ध - KAVITA RAWAT
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Monday, May 18, 2015

सच और झूठ का सम्बन्ध

झूठ सौ पर्दों में छिपकर भी सच का सामना नहीं कर सकता है।
सच बनाव- श्रृंगार नहीं, वह तो नग्न रहना पसन्द करता है।।

जो किसी के हित में झूठ बोले वह उसके विरुद्ध भी बोल सकता है।
सच दो टूक में लेकिन झूठ अपनी बात को घुमा-फिरा कर रखता है।।

जिसकी बात झूठी निकली फिर उस पर कोई यकीन नहीं करता है।
सच उथले में नहीं वह तो काई के ढके तालाब में छिपा रहता है।।

सच की डोर भले ही लम्बी खिंच जाय लेकिन कोई तोड़ नहीं पाता है।
भले झूठ की रफ्तार तेज हो लेकिन सच उससे आगे निकल जाता है।।

सच की शक्ल देखकर बहुत सारे लोग भयभीत हो जाते हैं।
सच का कोई दुन्नन नहीं फिर भी उसे दुश्मन मिल जाते हैं।।

झूठ की उम्र छोटी लेकिन जबान बहुत लम्बी रहती है।
हवा हो या तूफान सच की ज्योति कभी नहीं बुझती है।।

एक झूठ को छिपाने के लिए दस झूठ बोलने पड़ते हैं।
सच और गुलाब हमेशा कांटों से घिरे रहते हैं।।

झूठा इंसान एक न एक दिन पकड़ में आता है।
झूठ से भरा जहाज मझधार में डूब जाता है।।

कविता संग्रह लोक उक्ति में कविता से 

23 comments:

दिगम्बर नासवा said...

सच के बारे में जो भी कहा है सौ फी सदी सच कहा है ... एक सच ही है जो चमकता रहता है काली रात में भी ... चाहे लोग उसे देखें या न देखें ...

vijay said...

सच-झूठ को लोकोक्तियों के द्वारा सुन्दर ढंग से समझाया है आपने .......
बहुत सुन्दर .,.........

Unknown said...

सत्य लाख पर्दों के पीछे छुपा हो लेकिन एक दिन सामने जरूर आता है ...............अति सुन्दर

dj said...

झूठ की उम्र चन्द समय की ही होती है। आखिरकार तो जीत सत्य की ही होती है।
बढ़िया रचना

Unknown said...

सत्यमेव जयते ...

Rishabh Shukla said...

sundar rachna...................yahee satya hai

सुशील कुमार जोशी said...

सुंदर ।

सु-मन (Suman Kapoor) said...

बहुत बढ़िया

अरुण चन्द्र रॉय said...

मार्गदर्शक दोहे

Manoj Kumar said...

सुन्दर एवं सत्य

Anurag Choudhary said...

दीदी सच का सामना वही कर सकता है जो खुद सच्चा हकस।

Sampat kumari said...

सच तो सच ही है छुप नहीं सकता। कविताजी कृपया मेरा ब्लॉग wikismarter.com ज्वाइन कीजिये न।

Anonymous said...

सच
http://hradaypushp.blogspot.in/2013/09/blog-post.html

महेन्‍द्र वर्मा said...

सच तो सच होता है,


अच्छी प्रस्तुति ।

Ashutosh said...

मार्गदर्शन करने वाली रचना .
हिंदीकुंज

Tamasha-E-Zindagi said...

सुन्दर

कहकशां खान said...

सच कहा। झूठ को कभी छिपा कर नहीं रखा जा सकता क्‍योंकि झूठ बिना पांव का आभासी जीव होता है।

रचना दीक्षित said...

सच को बनाव श्रृंगार नहीं पसंद .....

कितनी अच्छे से भाव को पेश किया है.

कविता जी बहुत बहुत बधाई.

Unknown said...

sundar rachna...satya batati,,,

Himkar Shyam said...

सुंदर भावाभिव्यक्ति, सच सामने आ ही जाता है, झूठ सौ पर्दों में छिप कर भी सच का सामना नहीं कर सकता...

आशा जोगळेकर said...

सच सामने जरूर आता है पर कभी कभी कितनी देर से............।
सुंदर प्रस्तुति।

Tayal meet Kavita sansar said...

बहुत सुन्दर

Unknown said...

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