झूठ हजार पर्दों में छिपकर भी, सत्य का सामना कर नहीं सकता,
सत्य को बनाव-श्रृंगार की आवश्यकता नहीं, वह तो नग्न रहना ही चुनता।
जो किसी के हित में झूठ बोल सकता है, वह किसी के विरुद्ध भी बोल जाएगा,
सत्य सदा दो-टूक होता है, झूठ अपनी बातों को सदैव घुमाएगा।
जिसकी वाणी में ही असत्य हो, उस पर कोई विश्वास नहीं करता,
सत्य उथला नहीं होता, वह तो गहरे, काई-ढके तालाब सा ठहरता।
सत्य की डोर भले ही लंबी खिंच जाए, पर उसे कोई तोड़ नहीं पाता,
झूठ की गति भले ही तीव्र हो, सत्य अंततः उससे आगे निकल ही जाता।
सत्य का मुख देखते ही, मिथ्याचारी भयभीत हो जाते हैं,
सत्य का कोई शत्रु नहीं, फिर भी वे उसे अपना बैरी बना लेते हैं।
झूठ की उम्र तो अल्प होती है, पर उसकी जिह्वा अत्यंत लंबी है,
सत्य की ज्योति अविनाशी, जो किसी आंधी या तूफान से न बुझती है।
एक झूठ को ढांपने हेतु, दस झूठ का ताना-बाना बुनना पड़ता है,
सत्य और गुलाब की नियति एक है, इन्हें सदा कांटों के बीच ही पनपना पड़ता है।
झूठा इंसान एक न एक दिन, अपनी ही बुनी जाल में फंस जाता है,
झूठ के भार से लदा हुआ, जहाज मझधार में ही डूब जाता है।
... कविता रावत


22 टिप्पणियां:
सच के बारे में जो भी कहा है सौ फी सदी सच कहा है ... एक सच ही है जो चमकता रहता है काली रात में भी ... चाहे लोग उसे देखें या न देखें ...
सच-झूठ को लोकोक्तियों के द्वारा सुन्दर ढंग से समझाया है आपने .......
बहुत सुन्दर .,.........
सत्य लाख पर्दों के पीछे छुपा हो लेकिन एक दिन सामने जरूर आता है ...............अति सुन्दर
झूठ की उम्र चन्द समय की ही होती है। आखिरकार तो जीत सत्य की ही होती है।
बढ़िया रचना
सत्यमेव जयते ...
sundar rachna...................yahee satya hai
सुंदर ।
बहुत बढ़िया
मार्गदर्शक दोहे
सुन्दर एवं सत्य
दीदी सच का सामना वही कर सकता है जो खुद सच्चा हकस।
सच तो सच ही है छुप नहीं सकता। कविताजी कृपया मेरा ब्लॉग wikismarter.com ज्वाइन कीजिये न।
सच
http://hradaypushp.blogspot.in/2013/09/blog-post.html
सच तो सच होता है,
अच्छी प्रस्तुति ।
मार्गदर्शन करने वाली रचना .
हिंदीकुंज
सुन्दर
सच कहा। झूठ को कभी छिपा कर नहीं रखा जा सकता क्योंकि झूठ बिना पांव का आभासी जीव होता है।
सच को बनाव श्रृंगार नहीं पसंद .....
कितनी अच्छे से भाव को पेश किया है.
कविता जी बहुत बहुत बधाई.
sundar rachna...satya batati,,,
सुंदर भावाभिव्यक्ति, सच सामने आ ही जाता है, झूठ सौ पर्दों में छिप कर भी सच का सामना नहीं कर सकता...
सच सामने जरूर आता है पर कभी कभी कितनी देर से............।
सुंदर प्रस्तुति।
बहुत सुन्दर
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