सत्य और असत्य: एक शाश्वत द्वंद्व - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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सोमवार, 17 फ़रवरी 2025

सत्य और असत्य: एक शाश्वत द्वंद्व


झूठ हजार पर्दों में छिपकर भी, सत्य का सामना कर नहीं सकता,
सत्य को बनाव-श्रृंगार की आवश्यकता नहीं, वह तो नग्न रहना ही चुनता।

जो किसी के हित में झूठ बोल सकता है, वह किसी के विरुद्ध भी बोल जाएगा,
सत्य सदा दो-टूक होता है, झूठ अपनी बातों को सदैव घुमाएगा।

जिसकी वाणी में ही असत्य हो, उस पर कोई विश्वास नहीं करता,
सत्य उथला नहीं होता, वह तो गहरे, काई-ढके तालाब सा ठहरता।

सत्य की डोर भले ही लंबी खिंच जाए, पर उसे कोई तोड़ नहीं पाता,
झूठ की गति भले ही तीव्र हो, सत्य अंततः उससे आगे निकल ही जाता।

सत्य का मुख देखते ही, मिथ्याचारी भयभीत हो जाते हैं,
सत्य का कोई शत्रु नहीं, फिर भी वे उसे अपना बैरी बना लेते हैं।

झूठ की उम्र तो अल्प होती है, पर उसकी जिह्वा अत्यंत लंबी है,
सत्य की ज्योति अविनाशी, जो किसी आंधी या तूफान से न बुझती है।

एक झूठ को ढांपने हेतु, दस झूठ का ताना-बाना बुनना पड़ता है,
सत्य और गुलाब की नियति एक है, इन्हें सदा कांटों के बीच ही पनपना पड़ता है।

झूठा इंसान एक न एक दिन, अपनी ही बुनी जाल में फंस जाता है,
झूठ के भार से लदा हुआ, जहाज मझधार में ही डूब जाता है।

... कविता रावत 


22 टिप्‍पणियां:

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सच के बारे में जो भी कहा है सौ फी सदी सच कहा है ... एक सच ही है जो चमकता रहता है काली रात में भी ... चाहे लोग उसे देखें या न देखें ...

vijay ने कहा…

सच-झूठ को लोकोक्तियों के द्वारा सुन्दर ढंग से समझाया है आपने .......
बहुत सुन्दर .,.........

Unknown ने कहा…

सत्य लाख पर्दों के पीछे छुपा हो लेकिन एक दिन सामने जरूर आता है ...............अति सुन्दर

dj ने कहा…

झूठ की उम्र चन्द समय की ही होती है। आखिरकार तो जीत सत्य की ही होती है।
बढ़िया रचना

Unknown ने कहा…

सत्यमेव जयते ...

Rishabh Shukla ने कहा…

sundar rachna...................yahee satya hai

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुंदर ।

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

बहुत बढ़िया

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

मार्गदर्शक दोहे

Manoj Kumar ने कहा…

सुन्दर एवं सत्य

Anurag Choudhary ने कहा…

दीदी सच का सामना वही कर सकता है जो खुद सच्चा हकस।

Sampat kumari ने कहा…

सच तो सच ही है छुप नहीं सकता। कविताजी कृपया मेरा ब्लॉग wikismarter.com ज्वाइन कीजिये न।

बेनामी ने कहा…

सच
http://hradaypushp.blogspot.in/2013/09/blog-post.html

महेन्‍द्र वर्मा ने कहा…

सच तो सच होता है,


अच्छी प्रस्तुति ।

Ashutosh ने कहा…

मार्गदर्शन करने वाली रचना .
हिंदीकुंज

Tamasha-E-Zindagi ने कहा…

सुन्दर

कहकशां खान ने कहा…

सच कहा। झूठ को कभी छिपा कर नहीं रखा जा सकता क्‍योंकि झूठ बिना पांव का आभासी जीव होता है।

रचना दीक्षित ने कहा…

सच को बनाव श्रृंगार नहीं पसंद .....

कितनी अच्छे से भाव को पेश किया है.

कविता जी बहुत बहुत बधाई.

Unknown ने कहा…

sundar rachna...satya batati,,,

Himkar Shyam ने कहा…

सुंदर भावाभिव्यक्ति, सच सामने आ ही जाता है, झूठ सौ पर्दों में छिप कर भी सच का सामना नहीं कर सकता...

आशा जोगळेकर ने कहा…

सच सामने जरूर आता है पर कभी कभी कितनी देर से............।
सुंदर प्रस्तुति।

Tayal meet Kavita sansar ने कहा…

बहुत सुन्दर

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