संगति का प्रभाव - KAVITA RAWAT
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Saturday, May 15, 2010

संगति का प्रभाव




















उच्च विचार जिनके साथ रहते हैं वे कभी अकेले नहीं रहते हैं
एक जैसे पंखों वाले पंछी एक साथ उड़ा करते हैं

हंस-हंस के साथ और बाज को बाज के साथ देखा जाता है
अकेला आदमी या तो दरिंदा या फिर फ़रिश्ता होता है

तीन से भीड़ और दो के मिलने से साथ बनता है
आदमी को उसकी संगति से पहचाना जाता है

बिगडैल साथ भली गाय चली को बराबर मार पड़ती है
साझे की हंडिया अक्सर चौराहे पर फूटती है

सूखी लकड़ी के साथ-साथ गीली भी जल जाती है
और गुलाबों के साथ-साथ काँटों की भी सिंचाई हो जाती है

हँसमुख साथ मिल जाय तो सुनसान रास्ता भी आराम से कट जाता है
अच्छा साथ मिल जाने पर कोई रास्ता लम्बा नहीं रह जाता है

शिकारी पक्षी कभी एक साथ मिलकर नहीं उड़ा करते हैं
जो भेड़ियों की संगति में रहते हैं, वे गुर्राना सीख जाते हैं

 ..........कविता रावत

51 comments:

कडुवासच said...

...सुन्दर रचना !!

M VERMA said...

अकेला आदमी या तो दरिंदा या फिर फ़रिश्ता होता है
क्या बात कही आपने एकदम सही
बहुत सुन्दर

दिलीप said...

sahi kaha kavita ji...sangat hi gun hot hai...sangat hi gun jaat...

Unknown said...

बेहतरीन रचना ......

मनोज कुमार said...

संसार रूपी कटु-वृक्ष के केवल दो फल ही अमृत के समान हैं ; पहला, सुभाषितों का रसास्वाद और दूसरा, अच्छे लोगों की संगति ।

अजय कुमार said...

सामयिक और सटीक रचना । आजकल ब्लागिंग में कुछ गड़बड़ हो रहा है ।

मुकेश कुमार सिन्हा said...

Kavita jee...........ye to updesh jaisa lag raha hai...:)

waise aap achchha likhte ho......no doubts...!

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

"अकेला आदमी या तो दरिंदा या फिर फ़रिश्ता होता है
गुलाबों के साथ-साथ काँटों की भी सिंचाई हो जाती है
जो भेड़ियों की संगति में रहते हैं, वे गुराना सीख जाते हैं"

बहुत पसंद आये !

Rajeysha said...

शायर,सि‍न्‍ह और सपूत एकले ही चलते हैं, झुण्‍ड में नहीं। उनकी संगति‍ वि‍रली ही होती है, वि‍रले के साथ।

sandhyagupta said...

बिगडैल साथ भली गाय चली को बराबर मार पड़ती है
साझे की हंडिया अक्सर चौराहे पर फूटती है
सूखी लकड़ी के साथ-साथ गीली भी जल जाती है
और गुलाबों के साथ-साथ काँटों की भी सिंचाई हो जाती है

sundar aur sarthak lekhan.

अरुणेश मिश्र said...

जाड्यं धियो हरति सिञ्चति वाचि सत्यं.......,
आपकी रचना प्रेरक एवँ उत्तम समाज की निधि है ।

Udan Tashtari said...

अच्छी सीख देती रचना...बढ़िया है!

Kumar Jaljala said...

कौन है श्रेष्ठ ब्लागरिन
पुरूषों की कैटेगिरी में श्रेष्ठ ब्लागर का चयन हो चुका है। हालांकि अनूप शुक्ला पैनल यह मानने को तैयार ही नहीं था कि उनका सुपड़ा साफ हो चुका है लेकिन फिर भी देशभर के ब्लागरों ने एकमत से जिसे श्रेष्ठ ब्लागर घोषित किया है वह है- समीरलाल समीर। चुनाव अधिकारी थे ज्ञानदत्त पांडे। श्री पांडे पर काफी गंभीर आरोप लगे फलस्वरूप वे समीरलाल समीर को प्रमाण पत्र दिए बगैर अज्ञातवाश में चले गए हैं। अब श्रेष्ठ ब्लागरिन का चुनाव होना है। आपको पांच विकल्प दिए जा रहे हैं। कृपया अपनी पसन्द के हिसाब से इनका चयन करें। महिला वोटरों को सबसे पहले वोट डालने का अवसर मिलेगा। पुरूष वोटर भी अपने कीमती मत का उपयोग कर सकेंगे.
1-फिरदौस
2- रचना
3 वंदना
4. संगीता पुरी
5.अल्पना वर्मा
6 शैल मंजूषा

Kumar Jaljala said...

कौन है श्रेष्ठ ब्लागरिन
पुरूषों की कैटेगिरी में श्रेष्ठ ब्लागर का चयन हो चुका है। हालांकि अनूप शुक्ला पैनल यह मानने को तैयार ही नहीं था कि उनका सुपड़ा साफ हो चुका है लेकिन फिर भी देशभर के ब्लागरों ने एकमत से जिसे श्रेष्ठ ब्लागर घोषित किया है वह है- समीरलाल समीर। चुनाव अधिकारी थे ज्ञानदत्त पांडे। श्री पांडे पर काफी गंभीर आरोप लगे फलस्वरूप वे समीरलाल समीर को प्रमाण पत्र दिए बगैर अज्ञातवाश में चले गए हैं। अब श्रेष्ठ ब्लागरिन का चुनाव होना है। आपको पांच विकल्प दिए जा रहे हैं। कृपया अपनी पसन्द के हिसाब से इनका चयन करें। महिला वोटरों को सबसे पहले वोट डालने का अवसर मिलेगा। पुरूष वोटर भी अपने कीमती मत का उपयोग कर सकेंगे.
1-फिरदौस
2- रचना
3 वंदना
4. संगीता पुरी
5.अल्पना वर्मा
6 शैल मंजूषा

DR. ANWER JAMAL said...

ग़ज़ल


आदमी आदमी को क्या देगा


जो भी देगा ख़ुदा देगा ।


मेरा क़ातिल ही मेरा मुंसिफ़ है


क्या मेरे हक़ में फ़ैसला देगा ।


ज़िन्दगी को क़रीब से देखो


इसका चेहरा तुम्हें रूला देगा ।


हमसे पूछो दोस्त क्या सिला देगा


दुश्मनों का भी दिल हिला देगा ।


इश्क़ का ज़हर पी लिया ‘फ़ाक़िर‘


अब मसीहा भी क्या दवा देगा ।

http://vedquran.blogspot.com/2010/05/hell-n-heaven-in-holy-scriptures.html

संजय भास्‍कर said...

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

nilesh mathur said...

bahut sundar!

हर्षिता said...

अच्छी प्रस्तुति है।

Mithilesh dubey said...

बहुत ही सुन्दर व लाजवाब प्रस्तुति ।

Unknown said...

शिक्षाप्रद और बेहतरीन ....भाव .......बहुत खूब

डॉ टी एस दराल said...

बहुत ज्ञानवर्धक बातें ।
शुक्रिया कविता जी ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

साझे की हंडिया अक्सर चौराहे पर फूटती है
सूखी लकड़ी के साथ-साथ गीली भी जल जाती है
और गुलाबों के साथ-साथ काँटों की भी सिंचाई हो जाती है


संदेशात्मक रचना...सटीक

Himanshu Mohan said...

अच्छा उपयोगी संकलन, लयबद्ध बुद्धिमत्ता वचन।

mukti said...

वाह ! बहुत ही अच्छी लगी कविता खासकर ये लाइनें -
-अकेला आदमी या तो दरिंदा या फिर फ़रिश्ता होता है
-शिकारी पक्षी कभी एक साथ मिलकर नहीं उड़ा करते हैं
जो भेड़ियों की संगति में रहते हैं, वे गुराना सीख जाते हैं

पी.एस .भाकुनी said...

अकेला आदमी या तो दरिंदा या फिर फ़रिश्ता होता है ....
achchi prastuti...ghyan vardhak post...

Anonymous said...

अच्छी सीख

hem pandey said...

इसी लिए कहा है-
कबीरा संगत साधु की हरै और की ब्याधि.
संगत बुरी असाधु की आठों पहर उपाध

Girish Billore Mukul said...

अतिउत्तम

दीपक 'मशाल' said...

जो भेड़ियों की संगत में रहते हैं गुर्राना सीख जाते हैं.. पर ये भी है कि 'चन्दन विष व्यापत नहीं लिपटे रहत भुजंग..' अच्छे भाव..

Harshvardhan said...

kavita ji bahut achchi prastuti haiaapki. kabile tareef

अरुणेश मिश्र said...

कोई अकेला कभी नही होता जो साथ मे है उसे देखने की फुर्सत किसको ?

अरुणेश मिश्र said...

कोई अकेला कभी नही होता जो साथ मे है उसे देखने की फुर्सत किसको ?

दिगम्बर नासवा said...

Uncha vichaar hi to insaan ki pahchaan hai ... achhe vichaar rakhne waon ka saath har koi chahta hai ....

HBMedia said...

bahut khub...atisundar

GSC said...

kavita ji mere blog 'gaurtalab'par aane ka bahut bahut shukriya!

रचना दीक्षित said...

आज तो बहुत कुछ कह डाला एक ही पोस्ट में, एक साफ़ सुथरा आईना दिखा गयी ये पोस्ट बधाई

Dr. Zakir Ali Rajnish said...

संगति के प्रभाव को उजागर करती शानदार रचना।
--------
क्या हमें ब्लॉग संरक्षक की ज़रूरत है?
नारीवाद के विरोध में खाप पंचायतों का वैज्ञानिक अस्त्र।

Anonymous said...

-----------------------------------
mere blog par meri nayi kavita,
हाँ मुसलमान हूँ मैं.....
jaroor aayein...
aapki pratikriya ka intzaar rahega...
regards..
http://i555.blogspot.com/

Dimple Maheshwari said...

bhty khoob.........kya khoob likhte ho...bda achha likhte ho...

Akanksha Yadav said...

बहुत सुन्दर सन्देश..सार्थक रचना..बधाई.

____________________________
'शब्द-शिखर' पर- ब्लागिंग का 'जलजला'..जरा सोचिये !!

Urmi said...

बहुत ही सुन्दर और लाजवाब रचना! बधाई!

Apanatva said...

sone see kharee baate .....

Unknown said...

Please aap is topic par muje ek निबंध likhkar bjejo skate ho.

Ravindra Singh Yadav said...

जीवन की विसंगतियाँ और प्रेरक सूक्तियों को सहेजती प्रभावोत्पादक रचना जो कहती है संख्या का भी महत्त्व होता है।

Ravindra Singh Yadav said...

जीवन की विसंगतियाँ और प्रेरक सूक्तियों को सहेजती प्रभावोत्पादक रचना जो कहती है संख्या का भी महत्त्व होता है।

Ravindra Singh Yadav said...

अंतिम पंक्ति में एक शब्द "गुराना" प्रकाशित हुआ है। शायद यह प्रचलित शब्द "गुर्राना " का रूप है। यदि उचित हो तो संशोधन कीजियेगा।

Ravindra Singh Yadav said...

अंतिम पंक्ति में एक शब्द "गुराना" प्रकाशित हुआ है। शायद यह प्रचलित शब्द "गुर्राना " का रूप है। यदि उचित हो तो संशोधन कीजियेगा।

सुशील कुमार जोशी said...

बढ़िया।

कविता रावत said...

जी सही कहा आपने प्रचलित शब्द गुर्राना ही है
धन्यवाद!

Zainab said...

आप लखनऊ शहर में किसी स्कूल में पढ़ा चुकी है?
मुझे लगता है कि आप शायद मेरे मिडिल स्कूल के गणित के शिक्षक थे!!!


मेरा अंदाज़ा ग़लत हो सकता है..

यदि आप कर सकते हैं तो कृपया स्पष्ट करें!!!

कविता रावत said...

जी नहीं! मेरी कर्मभूमि तो भोपाल ही है, हो सकता है मेरी शक्ल-सूरत आपके मिडिल स्कूल के गणित के शिक्षक से मिलती-जुलती हो