प्रकृति का अनूठा उपहार: बीज वाले केले का संस्मरण - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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रविवार, 20 अप्रैल 2025

प्रकृति का अनूठा उपहार: बीज वाले केले का संस्मरण

आमतौर पर ग्रीष्मकाल की सुबह सैर के लिए अनुकूल होती है, किंतु वर्षा ऋतु में यह अवसर कभी-कभी ही मिलता है। ऐसी ही एक स्मरणीय घटना 4 अगस्त 2018 की है। भोपाल के दक्षिण तात्या टोपे नगर (स्मार्ट सिटी क्षेत्र) के खंडहरनुमा सरकारी आवासों के बीच से गुजरते हुए मेरी दृष्टि कुछ गिरे हुए केले के पेड़ों पर पड़ी। वहाँ जलमग्न गड्ढों के किनारे बिखरे हुए केलों के गुच्छों के बीच से सैकड़ों छोटे-छोटे पौधे अंकुरित हो रहे थे, जो देखने में बिल्कुल गेहूँ के जवारे जैसे प्रतीत हो रहे थे।यह दृश्य मेरे लिए विस्मयकारी था, क्योंकि सामान्यतः यही माना जाता है कि केले में बीज नहीं होते। जिज्ञासावश, मैंने उन अंकुरित पौधों को एकत्र किया और कुछ अपने बगीचे में तथा कुछ श्यामला हिल्स स्थित जलेश्वर मंदिर परिसर में रोपित कर दिए। वर्षा के अनुकूल मौसम के कारण वे सभी पौधे सफलतापूर्वक पनप गए।

जिज्ञासा से साक्षात तक: 5 वर्षों का धैर्य
पाँच वर्ष पूर्व जो अनुभव मेरे लिए कौतूहल का विषय था, वह आज साकार हो चुका है। उन पौधों पर अब बीज वाले केले आ गए हैं, जो मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण और आश्चर्य का केंद्र बने हुए हैं। इस दुर्लभ प्रक्रिया को मैंने अपने यूट्यूब चैनल पर भी साझा किया है, ताकि प्रकृति प्रेमी इस अद्भुत घटनाक्रम को देख सकें।
वैज्ञानिक संदर्भ एवं विशेषताएँ
वनस्पति विज्ञान के अनुसार, विश्व में केले की लगभग 1000 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। बीज वाला केला, जिसे जंगली केला या 'पत्थर केला' भी कहा जाता है, वैज्ञानिक रूप से 'मूसा बाल्बिसियाना' (Musa balbisiana) या 'मूसा ब्रैचीकार्पा' के रूप में वर्गीकृत है। इसके अवलोकन से मुझे कुछ महत्वपूर्ण तथ्य ज्ञात हुए:
दीर्घ अवधि: जहाँ सामान्य केले एक वर्ष में फल देते हैं, वहीं बीज वाले इस केले को फलने में लगभग 5 वर्ष का समय लगा।
प्रजनन: इसकी विशेषता यह है कि यह अपनी जड़ों के कंद और बीजों, दोनों माध्यमों से उग सकता है।
स्वाद और संरचना: स्वाद में यह केला अत्यंत मधुर होता है, किंतु इसके भीतर काली मिर्च के आकार के सैकड़ों कठोर बीज होते हैं। गूदा कम होने और बीजों की अधिकता के कारण इसे खाना किसी चुनौती से कम नहीं है।
सामान्य केलों से भिन्नता: हम जो व्यावसायिक केले खाते हैं, उनमें बीज निष्क्रिय होते हैं। उन्हें उगाने के लिए जड़ के पास उगने वाले छोटे पौधों (Suckers) का ही उपयोग किया जाता है।
केले के वृक्ष की बहुआयामी उपयोगिता
केला केवल ऊर्जा का स्रोत ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है:
पोषण: इसका फल कार्बोहाइड्रेट और ऊर्जा का भंडार है।
सांस्कृतिक महत्व: दक्षिण भारत में भोजन परोसने के लिए इसके पत्तों का प्रयोग स्वास्थ्य और परंपरा दोनों दृष्टि से श्रेष्ठ माना जाता है।
हस्तशिल्प: वर्तमान में इसके तने के रेशों से धागे तैयार कर वस्त्र और सुंदर बैग भी बनाए जा रहे हैं।
प्रकृति अपने भीतर न जाने कितने रहस्य समेटे हुए है। मेरा यह अनुभव इस बात का प्रमाण है कि यदि हम सजग रहें, तो राह चलते भी हमें विज्ञान और प्रकृति के अद्भुत चमत्कार देखने को मिल सकते हैं।
...कविता रावत 

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4 टिप्‍पणियां:

गिरधारी खंकरियाल ने कहा…

एकदम नई जानकारी। क्या ये बीज मिल सकते है, और क्या ये बीज उत्तराखंड की जलवायु मे उग पाएंगे ?

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" सोमवार 17 एप्रिल 2023 को साझा की गयी है
पाँच लिंकों का आनन्द पर
आप भी आइएगा....धन्यवाद!

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" सोमवार 17 एप्रिल 2023 को साझा की गयी है
पाँच लिंकों का आनन्द पर
आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Anita ने कहा…

बीज वाले केले के बारे में पहली बार सुना, रोचक जानकारी !

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