भ्रष्टाचार! तेरे रूप हजार
कविता रावत
अप्रैल 26, 2011
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भ्रष्टाचार! तेरे रूप हजार, सदियों से अक्षुण्ण तेरा यह कारोबार। देख तेरा यह वैभवशाली ठाट-बाट, कौन करेगा अब तेरा बहिष्कार? यहाँ तो हर शीश ...
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