अक्ल के रंग : 'अ' के मुहावरों की काव्य धारा
कविता रावत
मई 11, 2026
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अपनी-अपनी अक्ल है सबकी, अपनी-अपनी माया, किसी ने इसे संवारा, तो किसी ने व्यर्थ गंवाया। कोई अक्ल का मारा भटके, कोई अक्ल का पुतला भारी, कोई अ...
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