माँ: एक मौन आहट, एक अनंत फिक्र
कविता रावत
मई 10, 2026
18
जब-जब भी मैं तेरे पास आया, तू अक्सर मिली मुझे छत के उस कोने में, चटाई पर सिमटी या कुर्सी पर विराजी, बड़े इत्मीनान से हुक्का गुड़गुड़ाते हुए। मै...
और पढ़ें>>
क्या आपको यह रचना पसंद आई?
ऐसी ही और रचनाओं के लिए मुझसे जुड़ें: