भले लोग भेड़ जैसे जो किसी को हानि नहीं पहुँचाते हैं - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Sunday, July 25, 2021

भले लोग भेड़ जैसे जो किसी को हानि नहीं पहुँचाते हैं

बह चुके पानी से कभी चक्की नहीं चलाई जा सकती है
लोहे से कई ज्यादा सोने की जंजीरें मजबूत होती है

चांदी के एक तीर से पत्थर में भी छेद हो सकता है
एक मुट्ठी धन दो मुट्ठी सच्चाई पर भारी पड़ता है

निर्धन मनुष्य की जान-पहचान बहुत मामूली होती है
गरीब की जवानी और पौष की चांदनी बेकार जाती है

घर में दाने हों तो उसके पगले भी सयाने बनते हैं
गरीब अपने घर में भी परदेशी की तरह रहते हैं

अवसर बादल की तरह देखते-देखते गायब हो जाता है 
बेवकूफ डंडा तो समझदार इशारे की भाषा समझता है 

जरूरत से ज्यादा समझदार, समझदार नहीं कहलाते हैं 
भले लोग भेड़ जैसे जो किसी को हानि नहीं पहुँचाते हैं

...कविता रावत 

24 comments:

विश्वमोहन said...

प्रत्येक पंक्ति एक गहन निहितार्थ के साथ! बहुत सुंदर।

Kamini Sinha said...

सादर नमस्कार ,

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (26-7-21) को "औरतें सपने देख रही हैं"(चर्चा अंक- 4137) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
--
कामिनी सिन्हा

Kamini Sinha said...

कृपया २६ की जगह २७ पढ़े
कल थोड़ी व्यस्तता है इसलिए आमंत्रण एक दिन पहले ही भेज रही हूँ।

Sweta sinha said...

सारगर्भित अभिव्यक्ति।
सादर

girdhari khankriyal said...

सार्थकता के साथ अभिनव कृति।

Subodh Sinha said...

"भले लोग भेड़ जैसे जो किसी को हानि नहीं पहुँचाते हैं" - रचना की हरेक पंक्ति तथाकथित "भेड़ों" की कटु सत्य की पोल खोलती हुई सी .. शायद ...

Jigyasa Singh said...


अवसर बादल की तरह देखते-देखते गायब हो जाता है
बेवकूफ डंडा तो समझदार इशारे की भाषा समझता है

जरूरत से ज्यादा समझदार, समझदार नहीं कहलाते हैं
भले लोग भेड़ जैसे जो किसी को हानि नहीं पहुँचाते हैं..सटीक सार्थक रचना।

Vocal Baba said...

एक मुट्ठी धन दो मुट्ठी सच्चाई पर भारी पड़ता है
निर्धन मनुष्य की जान-पहचान बहुत मामूली होती है
गरीब की जवानी और पौष की चांदनी बेकार जाती है
---------------------------------
गागर में सागर भरती ज्ञानवर्द्धक पंक्तियों के लिए आपको ढेरों बधाईयां कविता जी। गहरा अर्थ लिए सुंदर सृजन। सादर।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

हर पंक्ति कुछ न कुछ विशेष कहती हुई ।
विचारणीय ।

Manisha Goswami said...

प्रत्येक पंक्ति बहुत ही बेहतरीन और उम्दा है!

Shantanu Sanyal शांतनु सान्याल said...

सारगर्भित सृजन।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा said...

बहुत ही सुंदर व सारगर्भित रचना

Amrita Tanmay said...

अत्यंत प्रभावशाली ।

Marmagya - know the inner self said...

भले लोग भेड़ जैसे ही होते हैं। बहुत अच्छी, सारगर्भित रचना!--ब्रजेंद्रनाथ

MANOJ KAYAL said...

बहुत सुंदर रचना

Bharti Das said...

वाह लाजबाव पंक्तियां, अपना प्रभाव डालती हुई

जितेन्द्र माथुर said...

भोगा हुआ यथार्थ है इन पंक्तियों में - (शायद) आपका और मेरा भी। इसीलिए एक-एक शब्द दिल में उतर गया।

गोपेश मोहन जैसवाल said...

सुन्दर कविता !
मेरा एक सवाल है -
भले लोग भेड़ या फिर गधे ही क्यों होते हैं?
परसाई जी ने तो किसी से पिट-पिट कर भी उस से शराफ़त करने वाले को केंचुआ कहा है.

Anupama Tripathi said...

बेहतरीन भाव !!

दिगम्बर नासवा said...

बहुत खूब ...
आपका लिखा हर छंद आपके अपने निराले अंदाज़ की बयानी है ... अपनी बात को प्रखर, स्पष्ट और अनोखे अंदाज़ से रखा है आपने ... बहुत सार्थक लिखा है ... सच को सच बिना लाग लपेट के ...

Udan Tashtari said...

गहरी बात

Meena sharma said...

निर्धन मनुष्य की जान-पहचान बहुत मामूली होती है
गरीब की जवानी और पौष की चांदनी बेकार जाती है
हर पंक्ति गहरी बात कहती हुई। कमाल की उक्तियाँ हैं।

Suresh kumar said...

बेहतरीन भाव !

gabigahr said...

Harrah's Cherokee Casino and Hotel - Mapyro
Harrah's Cherokee Casino 오산 출장샵 and Hotel - Smoky Mountains National 영천 출장마사지 Park in Cherokee, 구리 출장안마 NC - Find reviews, hours 남양주 출장샵 of operation, directions, 경상남도 출장샵 and phone.