गज़ल: "अपनेपन का साथ तो बस एक सपना भाता है"
कविता रावत
दिसंबर 11, 2009
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अक्सर मुझको तन्हाई का, हर एक लम्हा भाता है, अपनेपन का साथ तो बस एक, सुंदर सपना भाता है। पास मेरे तो केवल अश्कों की ही ये जागीर बची, वक्त-ब...
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