मजदूर : सबके करीब सबसे दूर
कविता रावत
मई 01, 2019
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मजदूर! सबके करीब सबसे दूर कितने मजबूर! कभी बन कर कोल्हू के बैल घूमते रहे गोल-गोल ख्वाबों में रही हरी-भरी घास बंधी रही आस हो...
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