Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपनी कविता, कहानी, गीत, गजल, लेख, यात्रा संस्मरण और संस्मरण द्वारा अपने विचारों व भावनाओं को अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का हार्दिक स्वागत है।

बुधवार, 3 फ़रवरी 2010

मंगलवार, 26 जनवरी 2010

शुक्रवार, 22 जनवरी 2010

बुरी आदत

जनवरी 22, 2010 10
कभी-कभी कुछ लोकाक्तियों के माध्यम से जिसमें मनुष्य की विवशता की हँसी या किसी वर्ग विशेष पर कटाक्ष परिलक्षित होता है, उसे एक सूत्र में गू...
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सोमवार, 18 जनवरी 2010

शुक्रवार, 8 जनवरी 2010

बुधवार, 16 दिसंबर 2009

देश की जो रीति पहले थी वह समझो अब तक है जारी

दिसंबर 16, 2009 9
देश में एक ओर जहाँ शांतिप्रिय श्रीरामजी ने राज किया वहीँ दूसरी ओर अत्याचारी घमंडी रावण ने भी राज किया दोनों ओर ही थे धुरंधर यौद्धा और ...
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शुक्रवार, 11 दिसंबर 2009

गज़ल: "अपनेपन का साथ तो बस एक सपना भाता है"

दिसंबर 11, 2009 15
अक्सर मुझको तन्हाई का, हर एक लम्हा भाता है, अपनेपन का साथ तो बस एक, सुंदर सपना भाता है। पास मेरे तो केवल अश्कों की ही ये जागीर बची, वक्त-ब...
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रविवार, 6 दिसंबर 2009

यादों की डगर और अधूरे गीत

दिसंबर 06, 2009 12
हमने संजोए थे कुछ शब्द, कुछ अनकहे गीत, सिर्फ तुम्हें सुनाने को, तुम्हें रिझाने को। सोचा था जीवन के किसी मोड़ पर जब मिलेंगे, तो जी भर कर बात...
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रविवार, 8 नवंबर 2009

रविवार, 25 अक्टूबर 2009

जरूरी तो नहीं

अक्टूबर 25, 2009 11
देखकर कोई दहला देने वाला मंजर, हर हृदय में हाहाकार मच जाए... जरूरी तो नहीं। देखकर कोई सुंदर मनोरम दृश्य, हर अशांत मन को सुकून मिल जाए... जरू...
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शनिवार, 26 सितंबर 2009

अश्रु-स्तब्ध: एक त्रासदी

सितंबर 26, 2009 17
वह मौन खड़ी थी पास मेरे, पर दूर कहीं की वासी थी, ज्यों ठूँठ खड़ी हो तरु-शाखा, वह वैसी ही संन्यासी थी। क्षण भर को उठतीं पलकें उसकी, क्षण भर में...
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आस्था का आडंबर और भूखी मानवता

सितंबर 26, 2009 6
तीज-त्योहार का शुभ अवसर है, मंदिर में गूँजती घंटियों का स्वर है। पुष्प-पल्लवों से सुसज्जित देव-प्रतिमाएँ, दर्शन को आतुर श्रद्धालुओं की लंबी ...
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शनिवार, 19 सितंबर 2009

लाख बहाने

सितंबर 19, 2009 8
लाख बहाने पास हमारे सच भूल, झूठ का फैला हर तरफ़ रोग, जितने रंग न बदलता गिरगिट उतने रंग बदलते लोग। नहीं पता कब किसको किसके आगे रोना-झु...
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गुरुवार, 10 सितंबर 2009

रविवार, 2 अगस्त 2009

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