Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपनी कविता, कहानी, गीत, गजल, लेख, यात्रा संस्मरण और संस्मरण द्वारा अपने विचारों व भावनाओं को अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का हार्दिक स्वागत है।

शनिवार, 7 मई 2022

पानी रे पानी, तेरा रंग कैसा? (एक जल-व्यंग्य)

मई 07, 2022 2
दो दिन से नल का कंठ ऐसा सूखा है कि पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी। यह जल-आपूर्ति विभाग भी गजब है—कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर! हमसे कहा...
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शनिवार, 23 अप्रैल 2022

मंगलवार, 15 मार्च 2022

शुक्रवार, 4 मार्च 2022

सोमवार, 24 जनवरी 2022

कविता रावत का रचना संसार : ब्लॉगर रवि रतलामी समीक्षक

जनवरी 24, 2022 9
समीक्षक : ब्लॉगर रवि रतलामी  समीक्ष्य कृतियाँ - 1 - होठों पर तैरती मुस्कान 2 - लोक उक्ति में कविता 3 - कुछ भूली-बिसरी यादें 4 - कुछ खट्टे-मी...
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बुधवार, 5 जनवरी 2022

शनिवार, 1 जनवरी 2022

ऐसा हो नूतनवर्षाभिनंदन

जनवरी 01, 2022 9
मरुस्थली अन्तःस्थल में भरें संवेदना सहयोग, त्याग, उदारता से भरे मन परस्पर विरोध-विग्रह दूर हों सभी के कुछ ऐसा हो नूतनवर्षाभिनंदन बीज सा गलकर...
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रविवार, 19 दिसंबर 2021

ढपली और झुनझुने का गणित | हिन्‍दी कहानी |

दिसंबर 19, 2021 16
गर्मियों के दिन थे। सुबह-सुबह सेठ जी अपने बगीचे में घूमते-घामते ताजी-ताजी हवा का आनन्द उठा रहा थे। फल-फूलों से भरा बगीचा माली की मेहनत की रं...
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मंगलवार, 14 सितंबर 2021

हिन्दी का महोत्सव है हिन्दी दिवस

सितंबर 14, 2021 7
     लो फिर आ गया एक पर्व की तरह हमारा हिन्दी का महोत्सव। हर वर्ष की भांति 14 सितम्बर को हिन्दी चेतना जागृत करने, उसके प्रति निष्ठा व्यक्त क...
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गुरुवार, 9 सितंबर 2021

शुक्रवार, 21 मई 2021

कोरोना में अस्पताल के वे दिन: आपदा में जीवन के रंग

मई 21, 2021 25
अकेलेपन से सामंजस्य तक अस्पताल में स्वयं भर्ती होने का यह मेरा पहला अनुभव था। शुरुआती दो दिन गहरे अकेलेपन और एक अनजाने भय में बीते। चारों तर...
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सोमवार, 29 मार्च 2021

अबकी बार होली में कोरोना ने है पकड़ा

मार्च 29, 2021 8
अबकी बार होली में  कोरोना ने है पकड़ा चुराकर सब रंग मेरे अपने रंग में है जकड़ा गले में ठूसी जा रही हैं रंग बिरंगी गोलियां मुंह बांधे उड़ी...
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रविवार, 21 मार्च 2021

मतलबी दुनिया में एक दिन सबका आता है

मार्च 21, 2021 14
 न लालच, गुस्सा न शिकायत  एक समभाव वाला जीव वह भारी मेहनत करने के बाद भी रूखा, सूखा खाकर खुश रहता है  दुनिया भर का अत्याचार सहता है  जुग-जुग...
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