रेत की बुनियाद। गजल
कविता रावत
जनवरी 02, 2026
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रास्तों का इल्म है, न रहगुज़र का पता है, मगर हर शख्स को ऊंचाइयों का नशा है। वे जो बड़े नाज़ों-नखरों से पले हैं, हथेली पर सरसों उगाने चले हैं...
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