जिंदगी रहती कहाँ है
कविता रावत
अप्रैल 26, 2023
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अपने वक्त पर साथ देते नहीं यह कहते हुए हम थकते कहाँ है ये अपने होते हैं कौन? यह हम समझ पाते कहाँ है! दूसरों को समझाने चले हम अपनों को ...
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