ब्रह्मचारिणी देवी। माता का द्वितीय स्वरूप।
कविता रावत
सितंबर 23, 2025
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जय जय जय ब्रह्मचारिणी मैया, द्वितीय रूप में तुम हो दया। तप का तेज, मन में विराजे, शांत स्वरूप, मन को साजे। हाथ में कमंडल, माला सोहे, श्वेत व...
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