अंतिम यात्रा: एक मौन संघर्ष
कविता रावत
अगस्त 19, 2025
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न देखो उन बुझते हुए दीपों को, अभी तो इनमें लौ का शेष रहना बाकी है; न थामो उन उखड़ती हुई सांसों को, अभी तो इन्हें कुछ और मील चलना बाकी है। ज...
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