भोपाल गैस त्रासदी स्मृति गीत
कविता रावत
दिसंबर 03, 2025
1
आधी रात का वह मंजर, आँखों में थी जलन भारी। सिसकियों से गूँजा घर-घर, गैस ने जीवन था हारी। भोपाल रोया, भोपाल टूटा, जहरीली गैस ने जीवन लूटा। ...
और पढ़ें>>
क्या आपको यह रचना पसंद आई?
ऐसी ही और रचनाओं के लिए मुझसे जुड़ें: