
जब-जब भी मैं तेरे पास आया,
तू अक्सर मिली मुझे छत के उस कोने में,
चटाई पर सिमटी या कुर्सी पर विराजी,
बड़े इत्मीनान से हुक्का गुड़गुड़ाते हुए।
मैं चाहता था—
उस गुड़गुड़ाहट की ओट में दबे पाँव सीढ़ियाँ चढ़ूँ,
और अचानक तुझे चौंका दूँ!
पर मेरे पहुँचने से पहले ही, तू मुझे चौंका देती थी।
मेरे विस्मय पर कि—
'माँ, तेरी आँखें धुंधली हैं, कान भी तो कम सुनते हैं,
फिर तुझे मेरे आने की खबर कैसे हुई?'
तू हंसकर बतियाती—
'बेटा, माँ की नज़र भले कमज़ोर पड़ जाए,
पर उसके दिल की धड़कन कभी कमज़ोर नहीं पड़ती।
संतान को महसूस करने के लिए,
उसे आँख-कान की ज़रूरत नहीं पड़ती।'
अब माँ, वह धड़कन मैं कहाँ से लाऊँगा?
कभी भूलवश एक-दो दिन जो बात न कर पाता,
तो तेरी ममता व्याकुल हो उठती थी।
तू उलाहनों की पोटली लिए फोन मिलाती,
और सवालों की झड़ी लगा देती—
'सब ठीक तो है? क्या हुआ? बड़ी चिंता हो रही है...'
मैं झुंझलाकर अक्सर कहता—
'तू अपनी फिक्र किया कर माँ,
हमारी चिंता करके क्या हासिल होगा?'
तब तू बड़ी सादगी से समझाती—
'बेटा, माँ हूँ न, इसीलिए सबकी फिक्र करती हूँ।'
अब माँ, वह निस्वार्थ फिक्र करने वाला कहाँ मिलेगा?
पुकारता हूँ तुझे, पर अब उस खाली कोने से,
सिर्फ यादों की गुड़गुड़ाहट आती है।



18 टिप्पणियां:
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (29-11-2020) को "असम्भव कुछ भी नहीं" (चर्चा अंक-3900) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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सादर नमन।
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सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
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सुन्दर। नमन।
एक मां की भले ही नजर कमजोर पड़ जाए
लेकिन उसकी दिल की धड़कन कभी कमजोर नहीं पड़ती
उसे आंख-कान से देखने-सुनने की जरुरत नहीं पड़ती' मर्मस्पर्शी व प्रभावशाली लेखन।
मन को भीतर तक भिगो देने वाली रचना
बहुत दुःखद खबर है कविता जी। माँ का जाना और मातृ सत्ता की छाँव से अचानक वंचित हो जाना जीवन का सबसे मर्मांतक आघात है। एक बेटे के बिलखते उद्गार आँखों के साथमन को भीतर तक नम कर गए। एक बहु के लिए भी सास का जाना एक अपूर्णीय क्षति है। मेरी हार्दिक संवेदनाओं के साथ दिवंगत माँ की पुण्य स्मृति को सादर नमन। ईश्वर उनकी आत्मा को अपने श्री चरणों में जगह दे🙏🙏 सादर
माँ की भावनाओं को व्यक्त करती बहुत मार्मिक रचना, दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि
माँ आखिर माँ होती है। उसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता। बहुत सुंदर।
मेरी संवेदनाएं साथ हैं आदरणीया। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि
माँ के लिए बहुत सुन्दर और सटीक लिखा है. हर माँ ऐसी ही होती है. माताजी को हार्दिक श्रधांजलि.
बहुत मार्मिक ... माँ नहीं हो कर ही सब के साथ होती है ... उसका जाना दर्द का एहसास तो देता है ... उसकी कमी हमेशा हमेशा रहती है, वो बातें सदा साथ् रहती हैं ... पर माँ कहीं नहीं जाती ... मेरी श्रद्धांजलि माँ को ... नमन उनके श्री चरणों में ...
अत्यंत हृदयस्पर्शी एवं मार्मिक रचना... ईश्वर दिवंगत आत्मा को चिर शांति प्रदान करे... हार्दिक नमन् एवं श्रद्धांजलि...।
बहुत ही मार्मिक रचना। मां ऐसी ही होती है।
आपकी हृदय स्पर्शी रचना ने मन को द्रवित कर दिया..माँ का स्नेह ही इतना अपनत्व और प्रेम से भरा होता है कि उसकी जगह कोई नहीं ले सकता..मेरी संवेदनाएं आपके और परिवार के साथ हैं..सादर नमन सहित विनम्र श्रद्धांजलि ..।
कोमल भावनाओं से ओतप्रोत हृदयस्पर्शी .... - डॉ. शरद सिंह
मन को द्रवित कर दिया
मेरी संवेदनाए आपके साथ। मर्मस्पर्शी पंक्तियां।
बहुत ही बेहतरीन भावुक रचना ।
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