Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपनी कविता, कहानी, गीत, गजल, लेख, यात्रा संस्मरण और संस्मरण द्वारा अपने विचारों व भावनाओं को अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का हार्दिक स्वागत है।

शुक्रवार, 10 सितंबर 2010

गणेशोत्सव : सबको भाता गणपति बप्पा

सितंबर 10, 2010 43
भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू १० दिवसीय ज्ञान, बुद्धि और समृद्धि के प्रथम पूज्य देव गणेश जी के जन्मोत्सव का बड़ों को ह...
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रविवार, 15 अगस्त 2010

बचपन के स्वत्रंत्रता दिवस का वह एक दिन

अगस्त 15, 2010 46
शहर की महज औपचारिक दिशा की और निरंतर अग्रसर होती स्वत्रंत्रता दिवस की एक दिवसीय चकाचौध के बीच बचपन में गाँव के स्कूल में मनाये जाने वाले...
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रविवार, 8 अगस्त 2010

वर्षा ऋतु पर विशेष कविता: जब उमड़-घुमड़ बरसे पानी (Hindi Rain Poem)

अगस्त 08, 2010 34
उमड़-घुमड़ जब घिरे पयोधर, प्राण-वायु बहने लगती, इन श्यामल मेघों की संसृति, अद्भुत कौतुक है रचती। देख गगन में सघन घटाएँ, म्लान पादप मुस्काते ...
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रविवार, 1 अगस्त 2010

शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

सोमवार, 7 जून 2010

मंगलवार, 1 जून 2010

शुक्रवार, 16 अप्रैल 2010

शुक्रवार, 9 अप्रैल 2010

गुरुवार, 1 अप्रैल 2010

रविवार, 7 मार्च 2010

यही तो दस्तूर है: सब चलता रहता है!

मार्च 07, 2010 21
गाँव हो या शहर आज जब भी कोई घटना, दुर्घटना या सामाजिक सरोकार से सम्बंधित कुछ अहम् बातें सामने आती है तो अक्सर बहुत से लोगों को बड़े सहजता स...
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शनिवार, 27 फ़रवरी 2010

शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2010

रविवार, 14 फ़रवरी 2010

सोमवार, 8 फ़रवरी 2010

बुधवार, 3 फ़रवरी 2010

मंगलवार, 26 जनवरी 2010

शुक्रवार, 22 जनवरी 2010

बुरी आदत

जनवरी 22, 2010 10
कभी-कभी कुछ लोकाक्तियों के माध्यम से जिसमें मनुष्य की विवशता की हँसी या किसी वर्ग विशेष पर कटाक्ष परिलक्षित होता है, उसे एक सूत्र में गू...
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सोमवार, 18 जनवरी 2010

शुक्रवार, 8 जनवरी 2010

सूनापन

जनवरी 08, 2010 11
नव वर्ष के आगमन पर ब्लॉग पर किसी को भी शुभकामनाएं नहीं दे पाई, जिसका मुझे बेहद अफ़सोस है. जबकि मैंने सोचा था कि इस वर्ष मैं ब्लॉग पर पहली ...
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बुधवार, 16 दिसंबर 2009

देश की जो रीति पहले थी वह समझो अब तक है जारी

दिसंबर 16, 2009 9
देश में एक ओर जहाँ शांतिप्रिय श्रीरामजी ने राज किया वहीँ दूसरी ओर अत्याचारी घमंडी रावण ने भी राज किया दोनों ओर ही थे धुरंधर यौद्धा और ...
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शुक्रवार, 11 दिसंबर 2009

फिर वही बात हर किसी ने छेड़ी हैं

दिसंबर 11, 2009 15
अक्सर एकाकीपन ही मुझे अच्छा लगता अपनेपन से भरा साथ मिले किसी का जैसे यह दिखता कोई सुन्दर सपना है अपने पास तो आंसू ही शेष ऐसे दिखते जो...
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रविवार, 6 दिसंबर 2009

यादों की डगर और अधूरे गीत

दिसंबर 06, 2009 12
हमने संजोए थे कुछ शब्द, कुछ अनकहे गीत, सिर्फ तुम्हें सुनाने को, तुम्हें रिझाने को। सोचा था जीवन के किसी मोड़ पर जब मिलेंगे, तो जी भर कर बात...
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रविवार, 8 नवंबर 2009

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