कुछ ऐसा हो नूतनवर्षाभिनंदन। New Year poem
कविता रावत
दिसंबर 30, 2024
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आपस में कोई बैर भाव न रहे न रहे कोई जात-पात का बंधन हर घर आँगन में बनी रहे खुशहाली कुछ ऐसा हो नूतनवर्षाभिनंदन तोड़कर नफरत भरी सब दीव...
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