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ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपनी कविता, कहानी, गीत, गजल, लेख, यात्रा संस्मरण और संस्मरण द्वारा अपने विचारों व भावनाओं को अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का हार्दिक स्वागत है।

मंगलवार, 26 मई 2026

आम आदमी पर 'दोहरी मार': तत्काल रेल टिकट और नो-रिफंड नीति पर पुनर्विचार की जरूरत

मई 26, 2026 1
भारतीय रेलवे को हमारे देश की लाइफलाइन कहा जाता है, जो हर वर्ग के नागरिक को उसकी मंजिल तक पहुँचाती है। लेकिन रेलवे की कुछ नीतियां ऐसी हैं, जो...
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'क' वर्ण के मुहावरों की अनोखी कविता (3) | हिंदी मुहावरा-माला

मई 26, 2026 0
 'कलई खुलने' से 'कलेजा मुँह को आने' तक  जानिए 'क' वर्ण से जुड़े मुहावरों की बेहद खूबसूरत काव्यात्मक रूप। भेद प्रकट हो...
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शुक्रवार, 22 मई 2026

तपती गर्मी, बचपन की यादें और एक कालजयी कविता

मई 22, 2026 6
आज जब घर से बाहर कदम रखते ही सूरज की तपिश और लू के थपेड़े बदन को झुलसाने लगते हैं, तो अचानक मन बचपन के उन दिनों में लौट जाता है, जब हम किताब...
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'क' वर्ण के मुहावरों की अनोखी कविता (1) | हिंदी मुहावरा-माला

मई 22, 2026 0
  ' ककड़ी के चोर ' से ' कड़वा घूँट पीना '  तक जानिए ' क ' वर्ण से जुड़े मुहावरों की बेहद खूबसूरत काव्यात्मक रूप। ककड...
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शुक्रवार, 15 मई 2026

मंगलवार, 12 मई 2026

सोमवार, 11 मई 2026

कौन हो तुम - एक दार्शनिक प्रेम कविता

मई 11, 2026 39
कौन हो तुम! प्रथम प्रेम की प्रथम अनुभूति सी, शीतल समीर का मंद झोंका  या सप्तरंगी स्वप्नों का ताना-बाना बुनती अम्बर में कौंधती चपला? शरद क...
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रविवार, 10 मई 2026

माँ: एक मौन आहट, एक अनंत फिक्र

मई 10, 2026 18
जब-जब भी मैं तेरे पास आया, तू अक्सर मिली मुझे छत के उस कोने में, चटाई पर सिमटी या कुर्सी पर विराजी, बड़े इत्मीनान से हुक्का गुड़गुड़ाते हुए। मै...
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शनिवार, 9 मई 2026

संघर्षों से शिखर तक: मेरी माँ की अनकही कहानी | एक भावपूर्ण कविता

मई 09, 2026 1
वो कच्ची उम्र का कंधा, और जिम्मेदारियां भारी शहर की उन गलियों में, वो जंग जीत ली सारी कभी गाय-बकरी पाली, कभी खुद को होम कर डाला अंधेरे घर के...
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शुक्रवार, 8 मई 2026

माँ: संघर्ष, समर्पण और स्वाभिमान की जीवंत प्रतिमूर्ति

मई 08, 2026 62
त्याग और समर्पण का अनवरत सफर एक माँ ताउम्र, हर पल अपने घर-परिवार के लिए स्वयं को होम कर देती है। निस्वार्थ भाव से समर्पित होकर वह बच्चों क...
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गुरुवार, 7 मई 2026

स्मृतियों की गूँज और समय की दहलीज। दादी मां

मई 07, 2026 0
 कितनी निश्छल, कितनी सरल हैं दादी माँ, स्वयं की श्रवण-शक्ति क्षीण हो चुकी है, पर अपनी स्मृतियों का पिटारा खोलने बैठ जाती हैं। वे भली-भाँति प...
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