समझ न आता राज प्यार का। जन्मदिन विशेष - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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सोमवार, 8 जून 2026

समझ न आता राज प्यार का। जन्मदिन विशेष





"प्रेम के इस अनमोल सफर में, कभी न जाने कितनी भावनाएं उमड़-घुमड़कर अंतर्मन में बरसती थीं। आज गृहस्थी, बच्चों और पारिवारिक ज़िम्मेदारियों के बीच, बमुश्किल कुछ विशेष अवसरों पर ही उन शुरुआती दिनों की सुनहरी यादें ताज़ा करने के पल हाथ लगते हैं। आज ऐसा ही एक बेहद ख़ास और आनंदमयी अवसर है—मेरा जन्मदिन। इस पावन दिन पर, अतीत के झरोखे से निकलकर आईं मेरे पतिदेव की लिखी कुछ भावुक पंक्तियाँ, यादों के उपहार स्वरूप प्रस्तुत हैं..."

विवशता देखो इस पागल मन की,
कहता—दूर नहीं, हरदम तेरे करीब रहूँ।
समझ न आता राज प्यार का,
कैसे तुझको प्यार करूँ...

देख तेरी ये प्यार भरी निगाहें,
दिल तुझमें ही डूबने लगता।
इतना अनुराग भरा है इस दिल में,
कि बस खिंचा चला आता।
चाहती हैं ये आँखें तुझमें ही खोई रहें,
इन बेबस निगाहों को भला कैसे रोक पाऊँ?
समझ न आता राज प्यार का,
कैसे तुझको प्यार करूँ...

एक पल की दूरी भी अब अखरती है,
जब दर्द प्यार का रह-रहकर उठता।
जितनी भी दूरी बनानी चाही मैंने,
उतना ही इस मीठे दर्द का एहसास बढ़ता।
ये विरह की तड़प और ये दूरी का ख्याल,
इस नासमझ दिल को भला कैसे समझाऊँ?
समझ न आता राज प्यार का,
कैसे तुझको प्यार करूँ...

तारे गिन-गिनकर कटती हैं रातें,
पर तुझे देखते ही मन का सूरज उगता।
दिनभर नाचता है मन-मयूर यादों में,
न जाने शाम ढले यह कहाँ जा छिपता?
न दिल अपने पास है, न मन पर काबू,
अब तुम्हीं बताओ, भला कैसे खबरदार रहूँ?
समझ न आता राज प्यार का,
कैसे तुझको प्यार करूँ...

सुखद अहसास है तेरे मिलन का,
बड़ा अच्छा लगता है इस प्यार में खो जाना।
कैसा अनोखा बंधन है यह, जो पागल बना दे,
और अद्भुत है पागलपन में भी दिल का यूँ खुश होना!
जब मिला तेरा साथ, तो जीवन बन गया एक तराना,
फिर अब इस ज़माने से मैं क्यों डरूँ?
समझ न आता राज प्यार का,
कैसे तुझको प्यार करूँ...



19 टिप्‍पणियां:

विश्वमोहन ने कहा…

वाह! अनुराग की अद्भुत रागिनी!! बधाई और आभार!!!

Unknown ने कहा…

विशेष अवसरों पर प्रेम पातियाँ अपने रंग में रंग ही देती हैं
अति सुन्दर, बहुत बधाई!

बेनामी ने कहा…

super

Nitish Tiwary ने कहा…

sundar rachna. mere blog par bhi aaiye
http://iwillrocknow.blogspot.in/

Jyoti Dehliwal ने कहा…

प्यार से ओतप्रोत बहुत ही सुंदर प्रस्तुति।

'एकलव्य' ने कहा…


आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'सोमवार' ०५ फरवरी २०१८ को साप्ताहिक 'सोमवारीय' अंक में लिंक की गई है। आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

Sweta sinha ने कहा…

बैहद खूबसूरत.. रचना कविता दी👌💐

Lokesh Nashine ने कहा…

बहुत सुंदर

RAKESH KUMAR SRIVASTAVA 'RAHI' ने कहा…

आपकी लिखी रचना "मित्र मंडली" में लिंक की गई है https://rakeshkirachanay.blogspot.in/2018/02/55.html पर आप सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद!

गिरधारी खंकरियाल ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता। सादर बधाई।

Shakuntla ने कहा…

बहुत ही प्यार से भरी प्यारी रचना

Shakuntla ने कहा…

बहुत ही प्यार से भरी प्यारी रचना

रेणु ने कहा…

अनुरागी मन का सरस गान !!!!!! अनुपम भावों से भरी सुंदर रचना | सादर -----

Jyoti khare ने कहा…

वाकई प्रेम में मन पागल हो जाता है
शाश्वत प्रेम की शाश्वत अनुभूति
बहुत सुंदर रचना
सादर

Amit Agarwal ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता, कविता जी!

Atoot bandhan ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुति

तकनीक द्रष्टा ने कहा…

अत्यंत ही मन भावना प्रस्तुति!

Vinay Prajapati ने कहा…

अत्यंत ही प्यारी कविता!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत ही भावपूर्ण उर प्रेममय रचना ...
अनेक बार मन के भाव रचना को स्वाभाविक बना देते हैं ...

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