कड़ाके की घूप में
कविता रावत
अप्रैल 01, 2010
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मैंने देखा है अक्सर कच्ची कलियों को चटकते हुए कड़ाके की घूप में कुछ कलियों को देखा है खिलखिलाते हुए बेमौसम में! वे कलियाँ जो भ्रमित...
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