वे हथेली पर सरसों उगाने चले हैं। गीत
कविता रावत
जनवरी 05, 2026
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वे जो बड़े नाजो-नखरों से पले हैं, वे हथेली पर सरसों उगाने चले हैं। न मंज़िल का पता है, न खुद की खबर है, बस चले जा रहे हैं, चले जा रहे हैं। क...
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