जाड़ों की गुनगुनी धूप में छत की मुंडेर पर
कविता रावत
जनवरी 11, 2025
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जाड़ों की गुनगुनी धुप में छत की मुंडेर पर दिन-रात चुभती निष्ठुर सर्द हवाओं से होकर बेखबर सूरज की रश्मि सी बिखेर रही ...
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