पथरीली, संकरी राह में भटक रही ये जिंदगी
कविता रावत
जनवरी 18, 2025
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पथरीली, संकरी राह में भटक रही ये जिंदगी ओझल मंजिल लगता कदम-कदम पर फेरा है जब- जब भी दिखा उगता सूरज ख़ुशी का तब-तब मुझको गहन तम ने आक...
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