चटकता दर्पण और रिसते घाव
कविता रावत
जनवरी 18, 2025
23
" दुनिया की झूठी हमदर्दी और जिंदगी के संघर्ष को बयां करती एक मुकम्मल कविता।" पथरीली और संकरी राहों पर भटक रही यह ज़िंदगी, ओझल है ...
और पढ़ें>>
क्या आपको यह रचना पसंद आई?
ऐसी ही और रचनाओं के लिए मुझसे जुड़ें: