कलयुग में सब चलेगा, अब नशा ही नल में बहेगा
कविता रावत
जून 01, 2010
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कहाँ जा रहा है मुआ ये ज़माना किसको बताएं, क्या क्या बताना! लग रहा है बिन पानी सब सून न दाल गल रही है और न चून सुबह उठकर नल के पास ...
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