चंद्रघंटा माता का तृतीय रूप वंदना।
कविता रावत
सितंबर 24, 2025
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जय जय जय चंद्रघंटा माता तृतीय रूप में तुम हो विधाता। मस्तक पर घंटा, चंद्र का साया, दुष्टों का संहार, तेरा ही माया। हाथ में खड्ग, धनुष विराजे...
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