हर तरफ़ बस तुम ही तुम हो
कविता रावत
फ़रवरी 08, 2011
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मिटाकर दिल की तन्हाई, जो लाया ये वसंत है, खिले उपवन में देखो, हर तरफ़ बस तुम ही तुम हो। चमक जुगनू की तो पल भर में ओझल हो ही जाती है, मगर जो...
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