वर्षा ऋतु पर विशेष कविता: जब उमड़-घुमड़ बरसे पानी (Hindi Rain Poem)
कविता रावत
अगस्त 08, 2010
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उमड़-घुमड़ जब घिरे पयोधर, प्राण-वायु बहने लगती, इन श्यामल मेघों की संसृति, अद्भुत कौतुक है रचती। देख गगन में सघन घटाएँ, म्लान पादप मुस्काते ...
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