भ्रष्टाचार आज का कल्पतरु है।
कविता रावत
जुलाई 25, 2025
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सुना है पौराणिक काल में, एक कल्पतरु हुआ करता था, तले बैठ जिसके मानव, मनचाहा फल पाता था। पल में इच्छा पूर्ण होती, जीवन सुख-चैन से भर जाता, ज...
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